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ग्वालियर देखिए कैसे फिर गया लाखों लोगों की मेहनत पर पानी

ग्वालियर देखिए कैसे फिर गया लाखों लोगों की मेहनत पर पानी
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तोपखाना बांध

ग्वालियर पत्रिका ने चलाया था अमृतम जलम अभियान के तहत तोपखाना बांध को रिचार्ज करने के लिए हजारों लोगों ने किया था श्रमदान सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक 3 घंटे का प्रत्येक दिन लगभग 15 दिन लगातार चाहे वह पुलिस विभाग और प्रशासन हो चाहे स्व सहायता समूह हो सभी ने मिलकर किया था श्रमदान जिससे शहर के जलाशय रिचार्ज हो सके और शहर में पानी की किल्लत ना हो जिसके तहत शारदा विहार स्थित सिंधिया राजवंश के वक्त की बावड़ी खेड़ापति मंदिर के पास सिंधिया राजवंश की बनाई बावड़ी और ग्वालियर दुर्ग स्थित सूरजकुंड की की गई थी प्रत्येक वर्ष साफ सफाई आज उन चारों स्थानों को देखकर प्रतीत होता है कितने लोगों की मेहनत पर कैसे पानी फिर गया जैसा पहले था वैसा ही आज प्रशासन ने सफाई के बाद मुड़कर तक नहीं देखा लोगों ने जमीन पर अतिक्रमण कर लिया झाड़ झंकार इकट्ठे हैं कुंड में काई जमी हुई है रास्ता तक नहीं दिखता जगहों पर जाने के लिए

तोपखाना बांध की जमीन पर लोगों ने किया अतिक्रमण

ग्वालियर पत्रिका ने चलाया था अमृतम जलम अभियान के तहत तोपखाना बांध को रिचार्ज करने के लिए हजारों लोगों ने किया था श्रमदान सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक 3 घंटे का प्रत्येक दिन लगभग 15 दिन लगातार चाहे वह पुलिस विभाग और प्रशासन हो चाहे स्व सहायता समूह हो सभी ने मिलकर किया था श्रमदान जिससे शहर के जलाशय रिचार्ज हो सके और शहर में पानी की किल्लत ना हो जिसके तहत शारदा विहार स्थित सिंधिया राजवंश के वक्त की बावड़ी खेड़ापति मंदिर के पास सिंधिया राजवंश की बनाई बावड़ी और ग्वालियर दुर्ग स्थित सूरजकुंड की की गई थी प्रत्येक वर्ष साफ सफाई आज उन चारों स्थानों को देखकर प्रतीत होता है कितने लोगों की मेहनत पर कैसे पानी फिर गया जैसा पहले था वैसा ही आज प्रशासन ने सफाई के बाद मुड़कर तक नहीं देखा लोगों ने जमीन पर अतिक्रमण कर लिया झाड़ झंकार इकट्ठे हैं कुंड में काई जमी हुई है रास्ता तक नहीं दिखता जगहों पर जाने के लिए

सिटी सेंटर शारदा विहार कॉलोनी स्थित बावड़ी

ग्वालियर पत्रिका ने चलाया था अमृतम जलम अभियान के तहत तोपखाना बांध को रिचार्ज करने के लिए हजारों लोगों ने किया था श्रमदान सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक 3 घंटे का प्रत्येक दिन लगभग 15 दिन लगातार चाहे वह पुलिस विभाग और प्रशासन हो चाहे स्व सहायता समूह हो सभी ने मिलकर किया था श्रमदान जिससे शहर के जलाशय रिचार्ज हो सके और शहर में पानी की किल्लत ना हो जिसके तहत शारदा विहार स्थित सिंधिया राजवंश के वक्त की बावड़ी खेड़ापति मंदिर के पास सिंधिया राजवंश की बनाई बावड़ी और ग्वालियर दुर्ग स्थित सूरजकुंड की की गई थी प्रत्येक वर्ष साफ सफाई आज उन चारों स्थानों को देखकर प्रतीत होता है कितने लोगों की मेहनत पर कैसे पानी फिर गया जैसा पहले था वैसा ही आज प्रशासन ने सफाई के बाद मुड़कर तक नहीं देखा लोगों ने जमीन पर अतिक्रमण कर लिया झाड़ झंकार इकट्ठे हैं कुंड में काई जमी हुई है रास्ता तक नहीं दिखता जगहों पर जाने के लिए

किला स्थित सूरजकुंड

ग्वालियर पत्रिका ने चलाया था अमृतम जलम अभियान के तहत तोपखाना बांध को रिचार्ज करने के लिए हजारों लोगों ने किया था श्रमदान सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक 3 घंटे का प्रत्येक दिन लगभग 15 दिन लगातार चाहे वह पुलिस विभाग और प्रशासन हो चाहे स्व सहायता समूह हो सभी ने मिलकर किया था श्रमदान जिससे शहर के जलाशय रिचार्ज हो सके और शहर में पानी की किल्लत ना हो जिसके तहत शारदा विहार स्थित सिंधिया राजवंश के वक्त की बावड़ी खेड़ापति मंदिर के पास सिंधिया राजवंश की बनाई बावड़ी और ग्वालियर दुर्ग स्थित सूरजकुंड की की गई थी प्रत्येक वर्ष साफ सफाई आज उन चारों स्थानों को देखकर प्रतीत होता है कितने लोगों की मेहनत पर कैसे पानी फिर गया जैसा पहले था वैसा ही आज प्रशासन ने सफाई के बाद मुड़कर तक नहीं देखा लोगों ने जमीन पर अतिक्रमण कर लिया झाड़ झंकार इकट्ठे हैं कुंड में काई जमी हुई है रास्ता तक नहीं दिखता जगहों पर जाने के लिए