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Chhattisgarh culture: मनुष्य के हर भाव को बताते हैं छत्तीसगढ के यह लोक गीत, photos से समझिये गायन शैली

Chhattisgarh Art And Culture : छत्तीसगढ़ के गीत दिल को छु लेती है यहाँ की संस्कृति में गीत एवं नृत्य का बहुत महत्व है। इसीलिये यहाँ के लोगों में सुरीलीपन है। हर व्यक्ति थोड़े बहुत गा ही लेते है। और सुर एवं ताल में माहिर होते ही है। अब हम गीतों के बारे में चर्चा करेंगे एवं सुनेगें।

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Chhattisgarh Art And Culture

CG Barthari Folk Song: भरथरी कथा में दो पात्र है - भरथरी और गोपीचन्द, जिनसे ये कथा शुरु होती है। राजा भरथरी और भान्जा गोपीचन्द। बंगाल के जोगी जब उज्जैन जाते थे, उस यात्रा के वक्त छत्तीसगढ़ में भी भरथरी की कथा प्रचलित हो गई थी।

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Panthi folk Song: यह छत्तीसगढ़ के सतनामी जाति का परम्परागत नृत्य गीत है। गुरु घासीदास के पंथ से पंथी नाच का नामकरण हुआ है। विशेष अवसरों पर सतनामी ‘जैतखाम’ की स्थापना करते हैं और उसके आस-पास गोल घेरे में नाचते-गाते हैं। इसकी शुरुआत देवताओं की स्तुति से होती है।

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Chhattisgarh Dadariya Folk Song: यह मूलत एक प्रेम-गीत है जिसमें शृंगार की प्रधानता होती है। ददरिया दो-दो पंक्ति के स्फुट गीत होते हैं, जो लोक-गीति-काव्य के श्रेष्ठ उदाहरण होते हैं । ददरिया गीत स्त्री और पुरुष मिलकर अथवा अलग-अलग भी गाते हैं। जब स्त्री और पुरुष गाते हैं तब ददरिया सवाल-जबाब के रूप में गाया जाता है।  

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Pandvani Chhattisgarh Folk Song : पंडवानी ,छत्तीसगढ़ का वह एकल नाट्य है, जिसके बारे में दूसरे देश के लोग भी जानकारी रखते हैं। तीजन बाई ने पंडवानी को आज के संदर्भ में ख्याति दिलाई, न सिर्फ हमारे देश में, बल्कि विदेशों में।पंडवानी का अर्थ है पांडववाणी अर्थात पांडवकथा, महाभारत की कथा। ये कथा "परधान" तथा "देवार" जातियों की गायन परंपरा है।

Baans Maru folk song : बाँस गीत के गायक मुख्यत: रावत या अहीर जाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में राउतों की संख्या बहुत है। राउत जाति यदूवंशी माना जाता है। अर्थात इनका पूर्वज कृष्ण को माना जाता है। ऐसा लगता है कि गाय को जब जगंलों में ले जाते थे चखने के लिए, उसी वक्त वे बाँस को धीरे धीरे वाद्य के रुप में इस्तमाल करने लगे थे।