29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पाली की रितिका आत्मविश्वास बढ़ाने करती हैं दुर्गम स्थलों का सफर

सर्दी के सितम के दौरान जनवरी माह में जब रजाई से बाहर आना भी किसी को अच्छा नहीं लगता। ऐसी सर्दी में लेह-लद्दाख जैसे क्षेत्र में पूरी नदी ही जम जम जाती है। जंस्कार नदी भी इनमें से एक है। घोर शीत में दुर्गम स्थलों की सैर करने वाले इस नदी के जमने पर पानी की सतह पर बर्फ की मोटी चादर पर पैदल सफर करते हैं।

2 min read
Google source verification
दुर्गम स्थलों का सफर

घोर शीत में दुर्गम स्थलों की सैर करने निकला दल। जिसमें पाली की रितिका भी शामिल है।

दुर्गम स्थलों का सफर

घोर शीत में दुर्गम स्थलों के सफर पर पाली की रितिका सुराणा।

दुर्गम स्थलों का सफर

जंस्कार नदी पूरी तरह जमी हुई थी, उसे पार करने की तैयारी के जतन में दल।

दुर्गम स्थलों का सफर

जमी हुई जंस्कार नदी को पार करते हुए दल।

दुर्गम स्थलों का सफर

जमी हुई जंस्कार नदी को पार करने के बाद बर्फ पर ही तम्बू बनाकर रात गुजारने की तैयारी।

दुर्गम स्थलों का सफर

जमी हुई जंस्कार नदी को पार करने के दौरान इस तरह सामान खींचकर ले जाना पड़ा।

दुर्गम स्थलों का सफर

दुर्गम स्थल के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ते हुए।

दुर्गम स्थलों का सफर

60 किमी तक जमी हुई नदी पर सफर पूरा करने के बाद तिरंगे के साथ दल।