
योग: सिद्धि नामक नैसर्गिक शुभ योग प्रात: ७.२७ तक, इसके बाद अंतरात्रि अगले दिन सूर्योदय से पूर्व प्रात: ६.४५ तक व्यतिपात नामक नैसर्गिक अशुभ योग है। व्यतिपात नामक योग की समस्त घटियां सदैव समस्त शुभ कार्यों में त्याज्य कही गई है। करण: गर नामकरण दोपहर बाद २.२० तक, तदन्तर रात्रि २.४४ तक वणिज नामकरण है। इसके बाद भद्रा प्रारम्भ हो जाएगी। भद्रा में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: ८.३५ तक अमृत, प्रात: ९.५२ से पूर्वाह्न ११.०९ तक शुभ तथा दोपहर बाद १.४४ से सूर्यास्त तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.०६ से दोपहर १२.४७ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

राहुकाल: प्रात: ७.३० से ९.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे: आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (द, दी, दू, थ) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। सायं ६.५३ तक जन्मे जातकों की जन्म राशि कुम्भ व इसके बाद जन्मे जातकों की मीन राशि है। इनका लोहपाद से जन्म होने से कुछ शांति व दान पुण्य कर देना जातकों के हित में होगा। सामान्य रूप से ये जातक धनवान, प्रतिभाशील, कलाकार, सुंदर, विद्यावान, कलाकुशल, पराक्रमी, साहसी, शत्रुजित, दानी और बोलचाल व प्रश्नोत्तर में निपुण होते हैं। इनका भाग्योदय लगभग २१ से २४ वर्ष की आयु के मध्य हो जाता है। कुम्भ राशि वाले जातकों के आज बहुत से नवीन सम्पर्क होंगे। मित्रों से या उनके सहयोग से कार्यक्षेत्र में श्रेष्ठ लाभ भी प्राप्त होगा।