
मां सीता से जुड़ी दो खास जगह, दोनों का नाम सीतामढ़ी
जिस जगह जनक नंदनी ने जन्म लिया था, वह बिहार में है। उसे सीता माता के नाम से ही जाना जाता है जबकि जिस जगह मां सीता ने समाधि ली थी, वह उत्तर प्रदेश में है, उसे भी सीतामढ़ी के नाम से ही जाना जाता है।
माता सीता का जन्म कैसे हुआ था
रामायण के अनुसार, त्रेता युग में एकबार मिथिला नगरी में भयानक अकाल पड़ा। कई वर्षों तक बारिश नहीं हुई। बारिश नहीं होने के कारण राजा जनक बहुत परेशान थे। उन्होंने पुराहितों की सलाह पर खुद ही हल चलाने का निर्णय लिया। रामायण में बताया गया है कि जब राजा जनक हल चला रहे थे, उस दौरान धरती से मिट्टी का एक पात्र निकला, जिसमें माता सीता शिशु अवस्था में थीं। इसलिए इस जगह का नाम सीतामढ़ी पड़ गया।
उत्तर प्रदेश में एक और सीतामढ़ी
माता सीता से जुड़ी एक सीतामढ़ी उत्तर प्रदेश में है। बताया जाता है कि यह जगह प्रयागराज (इलाहाबाद) और वाराणसी के बीच है। रामायण के अनुसार, भगवान राम के द्वारा त्याग किये जाने के बाद माता सीता इसी जगह वाल्मिकि आश्रम में रहती थीं। यहीं पर लव-कुश को जन्म हुआ था। बताया जाता है कि माता सीता ने यहीं पर समाधि ली थी। इसी कारण इस जगह का नाम सीतामढ़ी पड़ गया। यहां पर माता सीता का एक भव्य मंदिर है। यहां पर एक एक सुदंर झील भी है। झील के किनारे भगवान हनुमान की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। बताया जाता है कि इस मंदिर की खोज स्वामी जितेन्द्रानंद तीर्थ ने की थी।
Published on:
11 May 2019 01:54 pm
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