Krishna Janmashtami 2019 : इन मंदिरों से है भगवान श्रीकृष्ण का विशेष नाता

Krishna Janmashtami 2019 : मथुरा-वृंदावन के बारे में कहा जाता है कि यहां कहीं से भी एक पत्थर उछाला जाए तो वह किसी न किसी मंदिर पर ही गिरता है। यही कारण है कि मथुरा-वृंदावन को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है।

By: Devendra Kashyap

Updated: 23 Aug 2019, 12:42 PM IST

Krishna Janmashtami 2019 इस बार दो दिन मनाई जा रही है। कृष्ण के जन्मस्थली मथुरा में 24 अगस्त को, तो वृंदावन में 23 अगस्त को। मथुरा-वृंदावन के बारे में कहा जाता है कि यहां कहीं से भी एक पत्थर उछाला जाए तो वह किसी न किसी मंदिर पर ही गिरता है। यही कारण है कि मथुरा-वृंदावन को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है।

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कहा जाता है कि इस नगरी में स्थित हर मंदिर का भगवान श्रीकृष्ण ( Lord Krishna ) से नाता भी है। जन्माष्टमी के इस शुभ अवसर पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं मथुरा-वृंदावन के उन मंदिरों के बारे में जिनसे देवकी नंदन का खास नाता है।

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कृष्ण जन्मभूमि मंदिर

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागरा में हुआ था। जिस जगह कन्हैया का जन्म हुआ था उस स्थान को कृष्ण जन्मभूमि कहा जाता है। कृष्ण जन्मभूमि की जन्माष्टमी विश्व प्रसिद्ध है। यह मंदिर मथुरा के बीचो-बीच है।

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द्वारकाधीश मंदिर

मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर यहां बहुत भीड़ होती है। माना जाता है कि जन्मभूमि के बाद द्वारकाधीश के मंदिर में सबसे ज्यादा पूजा होती है। इस मंदिर का निर्माण 1814 में हुआ था।

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निधिवन

निधिवन के बारे में कहा जाता है कि कान्हा आज भी यहां गोपियों से रास रचाने आते हैं। यहां पर शाम होते ही मंदिरों में विशेष तैयारियां की जाती है। बताया जाता है कि शाम होते ही सभी घरों की खिड़की दरवाजे बंद हो जाते हैं और पक्षी और जानवर भी निधिवन से चले जाते हैं।

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बांके बिहारी मंदिर

बांके बिहारी मंदिर वृंदावन में स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर के बिना वृंदावन की यात्रा पूरी नहीं होती है। यहां कान्हा के होने वाले अलग तरह के श्रृंगार को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर यहां पर एक सप्ताह पहले से तैयारी शुरू हो जाती है।

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राधा रमण मंदिर

जन्माष्टमी के मौके पर आप राधा रमण मंदिर भी जा सकते हैं। राधा रमण मंदिर काफी प्राचीन और भव्य मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना 1542 में हुई थी। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी शालिग्रम के रूप में स्थापित हैं।

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चीरघाट

चीरघाट कदम के पेड़ के लिए मशहूर है। कहा जाता है कि यहां मौजूद कदम के पेड़ पर भगवान कृष्ण ने राक्षस के वध के बाद विश्राम किया था। बताया तो ये भी जाता है कि बाल-गोपाल ने स्नान कर रही गोपियों की कपड़ों के लेकर इसी पेड़ पर चढ़ गए थे।

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कालिया दमन घाट

जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण को जानना है तो आप कालिया दमन घाट जा सकते हैं। कहा जाता है कि इसी घाट पर भगवान कृष्ण कालिया नाग का दमन कर लौटे थे।

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श्रृंगार घाट

यमुना तट पर स्थित श्रृंगार घाट राधा और कृष्ण को समर्पित है। कहा जाता है कि इसी घाट पर कृष्ण जी ने राधा का श्रृंगर किया था।

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