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देवेन्द्र फडणवीस ने ‘राजसत्ता की देवी’ मंदिर के पुजारियों से कराया गुप्त हवन! जानें कौन हैं वो देवी

देवेन्द्र फडणवीस ने 'राजसत्ता की देवी' मंदिर के पुजारियों से कराया गुप्त हवन! जानें कौन हैं वो देवी

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Maa Baglamukhi

महाराष्ट्र में सियासी उलट फेर के बीच देवेन्द्र फडणवीस ने एक बार राज्य की कमान संभाल ली है। देवेन्द्र फडणवीस शनिवार की सुबह एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसके बार में बताया जा रहा है कि 'राजसत्ता की देवी' माता बगलामुखी मंदिर के पुजारियों ने शुक्रवार की रात उनके ( देवेन्द्र फडणवीस ) घर में गुप्त हवन कराया!


मान्यता है कि राजसत्ता से जुड़े हर बड़े से बड़े राजनेता राज सिंहासन प्राप्ति की कामना लेकर बगलामुखी माता की शरण में पूजा, हवन करने जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। पीतांबरा पीठ दतिया में कई पूर्व प्रधानमंत्री, अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री सहित कई नेता बगलामुखी माता का आशीर्वाद लेने आते रहते हैं और राजयोग के लिए गुप्त हवन कराते हैं।


बगलामुखी मंत्र जप के नियम

बगलामुखी मंत्र के प्रारंभ में 'ह्री या ह्लीं' दोनों में से किसी भी बीज का प्रयोग किया जाता है। ह्रीं शब्द तब ही लगाए जाते हैं, जब आपका धन किसी शत्रु ने हड़प लिया है और ह्लीं का प्रयोग शत्रु को पूरी तरह से परास्त करने के लिए ही किये जाते हैं। माना जाता है कि इससे शत्रु को वश में करने की अद्भुत शक्ति मिलती है।


बताया जाता है कि अगर विशेष प्रयोजन या सफलता प्राप्ति के लिए रात में 11:30 बजे लेकर 2:30 बजे के बीच बगलामुखी के तांत्रिक मंत्रों से हवन यज्ञ किया जाता है तो माता बगलामुखी माता 24 घंटे में ही प्रसन्न होकर साधक की मनोकामना पूरी कर देती हैं। यही कारण है कि देवेन्द्र फडणवीस ने शुक्रवार की रात अपने आवास पर 12 बजे गुप्त हवन कराया और राजसत्ता की देवी का अह्वान किया!


बगलामुखी मात बीज मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखम पदम् स्तम्भय। जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।।

बताया जाता है कि विशेष कामना पूर्ति के लिए उपरोक्त मंत्र का जप रात्रि काल में करके उसी मंत्र से एक हजार मंत्रों का हवन किया जाए तो तत्काल शुभफल प्राप्त होता है।


कहां है मां पीतांबरा का ये सिद्धपीठ

मां पीतांबरा का ये सिद्धपीठ मध्यप्रदेश के दतिया में स्थित है। इसकी स्थापाना 1935 में स्वामी जी ने किया था। चर्तुभुज रूप में विराजमान मां पीतांबरा के एक हाथ में गदा, दूसरे में पाश, तीसरे में वज्र और चौथे हाथ में उन्होंने राक्षस की जिह्वा थाम रखी हैं।


मां बंग्लामुखी ही हैं देवी पीतांबरा

माना जाता है कि मां बंग्लामुखी ही पीतांबरा देवी हैं इसलिए उन्हें पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मां के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से करते हैं। मान्यता है कि अगर मां पीतांबरा की विधि-विधान से अनुष्ठान कर लिया जाए, तो मां जल्द ही सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं। यही कारण है कि राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त अर्चना करते हैं। इसलिए इन्हें राजसत्ता की देवी कहा जाता है।


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