1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हे भगवान : इस मंदिर में पशु की बलि देने के बाद भी नहीं निकलता खून, हर रोज होता है अजब सा चमत्कार

पशु की बलि देते ही यहां होता है अजब सा चमत्कार, कुछ ही पलों मे उठ खड़ा होता है पशु

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Shyam Kishor

May 24, 2019

maa mundeshwari

हे भगवान : इस मंदिर में पशु की बलि देने के बाद भी नहीं निकलता खून, हर रोज होता है अजब सा चमत्कार

क्या आपने कभी सुना या सोचा की किसी पशु की बलि दी जाये और उसका एक बूंद खून भी नहीं बहे, जी हां बिहार राज्य के कैमूर भभुआ में एक बहुत बड़ी ऊंचाई वाली पहाड़ी पर स्थित अति प्राचीन मंदिर हैं जिसमें मां मुंडेस्वरी माता स्थापित है। यहां की मान्यता है कि बकरे की बली देते ही मनोकामना हो जाती है पूरी, लेकिन सबसे बड़ा चमत्कार यह होता है कि बकरे की बलि देने के बाद भी बकरे के शरीर से एक बूंद भी खून नहीं निकलता। जानें मंदिर से जुड़ा अद्भूत चमत्कारी रहस्य।

दुनिया का एक मात्र मंदिर है ये

इस मंदिर में अष्टाकार गर्भगृह के कोने में देवी मां मुंडेस्वरी की दिव्य मूर्ति स्थापित है, और बीच में अष्टधातु से बना एक अनूठा चतुर्मुखी शिवलिंग भी स्थापित है। कहा जाता है कि मुंडेश्वरी माता ऐसा रूप पूरी दुनिया में और कहीं नहीं है। पहाड़ी पर स्थित इस मन्दिर तक जाने के रास्ते में दोनों तरफ़ गणेशजी, शिवजी की पत्थरों पर बनी अनेक कलाकृतियां देखने को मिलती है।

OMG!- शुक्रवार की रात ऐसा करते ही लक्ष्मी हो जायेगी मेहरबान, हो जायेंगे सारे सपने पूरे

चावल का लगता है भोग

मां मुंडेश्वरी धाम में माता को केवल चावल (तांडुल) का भोग ही लगता था और प्रसाद स्वरूप यही तांडुल भक्तों को वितरित किया जाता था। इस प्रसाद को खाने से अनेक बीमारिया स्वतः ही ठीक हो जाती है। लोग दूर-दूर से आते हैं यहां माता का आशीर्वाद पाने के लिए।

विलक्षण पशु बलि

मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर की सबसे बड़ी और विलक्षण विशेषता यह है कि यहां पशु बलि की सात्विक परंपरा है। यहां बकर की बलि दी जाती है, लेकिन उसकी हत्या नहीं जाती। कथानुसार, चंड-मुंड के नाश के लिए मां दुर्गा ने मां मुंडेश्वरी का अद्भूत रूप धारण कर इसी पहाड़ी में छिपे चंड-मुंड का यहीं पर वध किया था, तभी से यहां माता की मां मुंडेश्वरी रूप में पूजा आराधना होने लगी।

बकरे की बलि मनोकामना हो जाती है पूरी

यहां श्रद्धालु भक्त अपना कामनाएं पूरी होने के बाद बकरे की सात्विक बलि देते हैं। लेकिन माता रक्त की बलि नहीं लेतीं, जब बलि देने के लिए बकरे को माता की मूर्ति के सामने लाया जाता है तो पुजारी 'अक्षत' (चावल के दाने) को मां मुंडेश्वरी की मूर्ति को स्पर्श कराकर बकरे पर फेंकते हैं और बकरा उसी क्षण अचेत, मृतप्राय सा हो जाता है। थोड़ी देर के बाद अक्षत फेंकने की प्रक्रिया फिर होती है तो बकरा उठ खड़ा होता है और इसके बाद ही उसे मुक्त कर दिया जाता है। यहां पर मन्नतों की घंटी बाधी जाती है और माता रानी के दर्शन मात्र से मिट जाते हैं जन्म जन्मान्तर के दुःख व पाप।

खबर आपके काम की : हर इच्छा हो जायेगी पूरी, मां भवानी केे इन मंत्रों में से जप लें कोई भी एक मंत्र

ऐसे पहुंचे मां मुंडेश्वरी के मंदिर

बिहार का भभुआ बनारस से 60 किलोमीटर और गया से 150 किलोमीटर की दुरी पर है। यहां जीटी रोड से आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर कोई रेल मार्ग से जाना चाहें तो बनारस, मुगलसराय, सासाराम, गया से मोहनियां स्टेशन (भभुआ रोड) (मुगलसराय-गया लाइन पर) आ सकते हैं, वहां से मन्दिर तक के लिए वाहनों की व्यवस्था 24 घंटे उपलब्ध रहती है।

**********