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महाराष्ट्र में भाजपा सरकार गिरने के बाद पहली बार फडणवीस से मिले अजित पवार, मौसम पर की चर्चा

महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने अचानक मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सबको चौंका दिया था। हालांकि बहुमत न होने के कारण 80 घंटे भी यह सरकार नहीं चल पाई थी।

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Ajit pawar devendra Fadnavis

मुंबई : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। रविवाद को इन दोनों नेताओं की मुलाकात निर्दलीय विधायक संजय शिंदे की शादी में हुई। इस विवाह समारोह में ये दोनों आमंत्रित थे। शादी समारोह में दोनों एक ही सोफे पर बैठे नजर आए। इसके बाद ये दोनों मीडिया की नजरों में भी आ गए और उनकी खूब तस्वीरें खींची गई। बता दें कि पिछले दिनों इन दोनों के संयुक्त प्रयास से बनी 80 घंटे की सरकार के गिरने के बाद यह पहली मुलाकात थी।

अजित पवार ने कहा, राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं

अजित पवार ने इस मुलाकात को लेकर सोमवार को बारामती में कहा कि राजनीति में कोई भी स्थायी दुश्मन नहीं होता। इस मुलाकात पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उस शादी में उन्हें आमंत्रित किया गया था। इस दौरान हम दोनों एक साथ बैठे थे और सिर्फ मौसम पर चर्चा की।

नई सरकार में मंत्री पद पर बोले, पार्टी का होगा फैसला

महा विकास अघाड़ी सरकार में मंत्री पद लेने पर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का विशेषाधिकार है। वही इस पर निर्णय लेंगे। वह इस सरकार में मंत्री या उपमुख्यमंत्री होंगे इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पद पर चाहते हैं, लेकिन अंतिम इसका अंतिम निर्णय राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और महा विकास अघाड़ी का होगा। इस गठबंधन में शिवसेना और कांग्रेस भी शामिल हैं।

सिंचाई घोटाले में मिली क्लीन चिट पर साधी चुप्पी

इस दरमियान जब उनसे सिंचाई घोटाले में जांचकर्ताओं की ओर से मिली 'क्लीन चिट' को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बता दें कि पिछले महीने 23 तारीख को फडणवीस और पवार ने मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के तौर पर अचानक सुबह-सुबह शपथ लेकर सबको चौंका दिया था। हालांकि यह सरकार बहुमत न होने के कारण 80 घंटे भी नहीं चल सकी और इन दोनों को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राज्य में शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा ने मिलकर सरकार बनाई।

भाजपा ने कर्नाटक में हुए उपचुनाव में जबरदस्त कामयाबी हासिल की है। उसने 14 सीटों पर हुए उपचुनावों में से 12 पर जीत हासिल की है। इस वजह से भी इन दोनों की मुलाकात पर राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर गहरी बनी हुई है।