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फैसले की ओर लड़ाई: अखिलेश को 220 MLAs ने सौंपा हलफनामा

लखनऊ में सपा कार्यकताओं और विधायकों की बैठक में पार्टी के करीब 220 विधायक और दो दर्जन से ज्यादा एमएलसी ने अपने हस्ताक्षरयुक्त हलफनामे सीएम अखिलेश को सौंप दिए हैं।

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Anuj Shukla

Jan 05, 2017


- महेंद्र प्रताप सिंह
लखनऊ. समाजवादी पार्टी में चुनाव चिन्ह साइकिल को लेकर चल रहे संघर्ष में पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव से लगभग हार चुके हंै। केंद्रीय चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव से अपने समर्थक विधायकों का हलफनामा मांगा है। ये हलफनामा दोनों गुटों को 9 जनवरी तक आयोग को सौंपना है।

इसके पहले गुरुवार को लखनऊ में सपा कार्यकताओं और विधायकों की बैठक में पार्टी के करीब 220 विधायक और दो दर्जन से ज्यादा एमएलसी ने अपने हस्ताक्षरयुक्त हलफनामे सीएम अखिलेश को सौंप दिए हैं। तमाम पार्टी सदस्यों ने भी अपनी निष्ठा अखिलेश के जताई है। जल्द ही अखिलेश समर्थक इस एफीडेविट को चुनाव आयोग के समक्ष पेश करेंगे। उधर, सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह और शिवपाल यादव बाहर जाने को तैयार हैं।

मुलायम के आवास पर मीटिंग

उधर, गुरवार की सुबह लखनऊ से नई दिल्ली पहुंचे मुलायम सिंह यादव के आवास पर उनके वफादार सर्मथकों की बैठक दर बैठक जारी है। बैठक में सासंद अमर सिंह, जया प्रदा के आलावा शिवपाल सिंह यादव भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि सपा की वर्तमान परिस्थितियों के बाद मुलायम सिंह यादव कोई ठोस निर्णय लेंगे।

सुलह-समझौतों की गुंजाइश खत्म

इसके पहले आजम खान ने दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौते के कई प्रयास किए लेकिन कोशिशें नाकाम रहीं। शिवपाल सिंह यादव केंद्रीय राजनीति में जाने को तैयार हैं लेकिन अखिलेश राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोडऩे को तैयार नहीं हैं। मुलायम सिंह भी राम गोपाल से बहुत खफा हैं। वे उन्हें माफ करने के मूड में नहीं हैं। जबकि अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने पर सहमति बन गई थी। लेकिन दोनों पक्षों के अड़े रहने की वजह से कोई बात नहीं बन सकी।

प्रो. रामगोपाल के भाई बोले-मुलायम की याददाश्त कम होने से हुई समस्या

समाजवादी पार्टी के शिखरपुरुष मुलायम सिंह यादव के घर पर सन्नाटा पसरा है। परिवार के कुछ बुजुर्ग व महिलाएं घर पर हैं, किन्तु सभी मौन साधे हैं। मुलायम से छोटे और प्रो.रामगोपाल के बड़े भाई रामदास यादव घर के बगल में बने तालाब की मुंडेर पर गांव के कुछ लोगों के साथ बैठे हैं। घर में चल रहे घमासान की चर्चा पर वे कहते हैं, किसे अच्छा लगता है यह सब। फिर बोले, मैं गया था नेताजी के पास... वे भी दुखी थे। मुझसे कहा, मास्साब (रामगोपाल) को डांटौ, वे हमाओ फोन नाई उठाय रहे। वे इस पूरे विवाद को बेवजह बताते हुए कहते हैं, मुलायम सिंह यादव की याददाश्त कम होने से ही पूरी समस्या पैदा हुई है। रामदास यादव ने बचपन मुलायम के साथ बिताया है।

चुनाव आयोग ने 9 जनवरी तक मांगा हलफनामा

चुनाव चिन्ह की लड़ाई को लेकर चुनाव आयोग ने सपा की साइकिल पर दावा ठोक रहे दोनों गुटों से अपना बहुमत साबित करने के लिए समर्थन देने वाले विधायकों, पार्षदों के 9 जनवरी तक हलफनामा मांगा है।

अमर सिंह और शिवपाल की विदाई की तैयारी

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमर सिंह पार्टी से इस्तीफा देने को तैयार हैं और शिवपाल भी यूपी सपा प्रदेश अध्यक्ष पद छोडऩे को तैयार हैं। यही नहीं अखिलेश के लिए शिवपाल अपनी सीट जसवंत नगर सीट छोडऩे को तैयार हैं, लेकिन मुलायम सिंह अड़े हुए हैं।

मैं नाउम्मीद नहीं: आजम खान

आजम खान सुलह की कोशिशों में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैं नाउम्मीद नहीं हूं। यह सब क्यों हुआ किसी से छिपा नहीं है, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते कि दोनों साथ आएं।

लोग चाहते हैं सपा की सरकार बने: अखिलेश

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने यह मन बना लिया है कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी की सरकार बने। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि 'जब चुनावी तारीख आ जाएं तो समझ लो ‘लड़ाई’ शुरू हो गई और मैं चाहता हूं कि प्रदेश की जनता एक बार फिर काम करने वालों को वोट दें।

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