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महाराष्ट्र: दोनों शिवसेना और दोनों NCP का गठबंधन, भाजपा को रोकने के लिए मिलाया हाथ

राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र के सोलापुर में देखने को मिला है। यहां आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए शिवसेना और एनसीपी के दोनों गुट साथ आ गए हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 25, 2026

Devendra Fadnavis, Eknath Shinde, Ajit Pawar

देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार (Photo: IANS)

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सोलापुर जिले के बार्शी तालुका में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव को लेकर बड़ा सियासी समीकरण सामने आया है। यहां भाजपा के खिलाफ दोनों शिवसेना और दोनों एनसीपी गुटों ने मिलकर महागठबंधन किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा (BJP) को घेरने के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी भी इस गठबंधन का हिस्सा है। जबकि दोनों ही दल भाजपा नीत महायुति (NDA) में भी शामिल है। इसी वजह से बार्शी का यह गठबंधन अब चर्चा का विषय बन गया है। 

उद्धव गुट ने दी प्रतिक्रिया

सोपल ने कहा, इस सियासी घटनाक्रम पर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के विधायक दिलीप सोपल ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि दोनों शिवसेना का एक साथ आना कोई जबरन कराया गया फैसला नहीं है, बल्कि हालात ऐसे बने कि यह अपने आप हो गया। कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है।

बार्शी के कद्दावर नेता दिलीप सोपल ने इस गठबंधन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "दोनों शिवसेना को साथ मैंने नहीं किया, बल्कि यह खुद-ब-खुद हो गया है। मैं कौन होता हूं एक साथ करने वाला? जो कराने वाले हैं, वे सब यहां मौजूद हैं।"

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के विधायक सोपल ने इस पूरे गठबंधन को फूलों की माला से जोड़ते हुए कहा कि ये सभी अच्छे फूल हैं और उन्हें अच्छे धागे में पिरोने का काम मैंने सुई बनकर किया है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में बार्शी तालुका के लिए यही एकमात्र विकल्प था।

बार्शी में क्यों बना यह समीकरण?

बार्शी में स्थानीय स्तर पर भाजपा नेता राजेंद्र राउत का दबदबा रहा है। पूर्व विधायक राउत की राजनीतिक पकड़ को टक्कर देने के लिए अलग-अलग दलों ने आपसी मतभेद दरकिनार कर एकजुट होने का रास्ता चुना है। इस गठबंधन की कमान दिलीप सोपल के हाथ में है।

बार्शी में भाजपा के खिलाफ बने इस गठबंधन ने सोलापुर के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चुनाव से पहले इस तरह विरोधी दलों का एकजुट होना यह साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव काफी दिलचस्प होने वाले हैं। सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस नए सियासी मेल का राज्य की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।