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सबरीमला मंदिर: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ तिरुवनंतपुरम में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन

इस मुद्दे पर भाजपा ने मार्च में बड़ी संख्‍या में अपने समर्थकों को जुटाकर केरल सरकार के सामने चुनौती पेश कर दी है।
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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 15 Oct 2018, 1:30 PM IST

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सबरीमला मंदिर: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ तिरुवनंतपुरम में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्‍ली। सबरीमला मंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज केरल इकाई भाजपा के नेतृत्‍व में एक विरोध मार्च तिरुवनंतपुरम में निकाला गया। इस मार्च में हजारों की संख्‍या में लोग शामिल हुए। इस मार्च में बड़ी संख्‍या में अपने समर्थकों को जुटाकर भाजपा ने शक्ति प्रदर्शन भी किया है। साथ ही सत्‍ताधारी पार्टी को साफ संकेत दे दिया है कि अब प्रदेश की राजनीति में भाजपा की अनदेखी भारी उसे पड़ सकता है। इन अनदेखी का लाभ भाजपा उठा सकती है।

फैसले पर पुनर्विचार की मांग
भाजपा प्रदेश इकाई के कार्यकर्ताओं ने मार्च के दौरान इस मसले पर देश के शीर्ष अदालत से विचार करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को भगवान अयप्‍पा के भक्‍तों की आस्‍था के मामले में हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहिए। सदियों की पंरपरा को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले समाप्‍त कर दिया है। इस फैसले से भक्‍तों में असंतोष है। यह विवाद आने वाले समय में और गहरा सकता है।

कमल हासन ने झाड़ा पल्‍ला
दक्षिण के सुपरस्‍टार और मक्कल निधि मय्यम पार्टी के प्रमुख कमल हासन ने इस मसले पर बयान देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह मसला सुप्रीम कोर्ट और भगवान अयप्‍पा के भक्‍तों के बीच का मसला है। चूंकि यह फैसला देश के शीर्ष अदालत का है इसलिए मैं इस पर कमेंट भी नहीं करूंगा। यानि कमल हासन ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है। उनके संकेत से साफ है कि वो इस मसले पर राजनीति नहीं करना चाहते हैं।

अब और गहराया प्रवेश का विवाद
आपको बता दें कि सबरीमला मंदिर में महिलाओं के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भगवान अयप्‍पा के भक्‍तों का विरोध प्रदर्शन थम नहीं रहा है। रविवार को चेन्‍नई में भारी संख्‍या में लोगों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले दिल्‍ली और चेन्‍नई में एक साथ भगवान अयप्‍पा के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन हुआ था। इसके साथ ही अयप्‍पा ट्रस्‍ट को अब अन्‍य धार्मिक और सामाजिक संगठनों का इस मुद्दे पर सहयोग मिलने लगा है। आज भाजपा ने तिरुवनंतपुरम में शक्ति प्रदर्शन को इस मसले को और तूल दे दिया है। साथ ही यह मसला अब कानूनी से ज्‍यादा राजनीतिक बनता जा रहा है। अयप्‍पा के समर्थकों का कहना है कि वो लोग अपनी परंपरा को बचाए रखने के लिए समर्थन हासिल कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि मंदिर में 10 से 50 तक की महिलाओं को शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद प्रवेश नहीं करने देंगे।

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