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एक महीने में टॉप टू की दावेदारी में आए चेतन, कई बार आगे-पीछे होने के बाद जीती रेस

कांग्रेस में दक्षिण प्रत्याशी को लेकर आखिरी समय तक मंथन चला, कई-तर्क प्रकार के समिकरणों पर चर्चा के बाद तय हुआ नाम

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कांग्रेस के चेतन यादव दक्षिण विधानसभा का टिकट लाने में सफल हुए हैं। इसे बेहद कड़े मुकाबले में उनकी पहली बड़ी जीत माना जा रहा है। सर्वे में नाम के चलते दावेदारों की दौड़ में तो वे पहले से थे ही लेकिन आखिरी के एक महीने में टॉप टू की दावेदारी में उनका नाम शामिल हो गया था। जिस रिद्म से रफ्तार बढ़ाकर चेेतन दावेदारों की दौड़ में आगे निकले, सभी के लिए चौकाने वाला है।

दक्षिण विधानसभा को लेकर कांग्रेस में मुख्य रूप से राजेंद्र वशिष्ठ, अजीत ठाकुर, चेतन यादव और बिनू कुशवाह की दावेदारी प्रमुख मानी जा रही थी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कुछ महीने पहले तक सबसे प्रबल दावेदार वशिष्ठ और फिर अजीतसिंह के नाम रहे। इधर पहले से दक्षिण की दावेदारी कर रहे चेतन कार्यकर्ता सम्मेलन व पार्टी कार्यक्रमों में लगे रहे। साथ ही कार्यकर्ताओं की मांग बनने का प्रयास करते रहे। चुनाव के दिन नजदीक आने पर अजीतसिंह के नाम को लेकर चर्चा बढ़ने लगी और माना जाने लगा कि वशिष्ठ दूसरे नंबर खीसक गए हैं। कार्यकर्ताओं की मांग बढ़ने से धीरे-धीरे चेतन यादव के नाम की चर्चा भी बढ़ना शुरू हो गई। कुछ सप्ताह पूर्व ही मुख्य मुकाबला अजीत और चेतन के बीच आकर टीक गया था। चर्चा यह भी थी कि यदि दोनों नाम पर सहमति नहीं बनी तो राजपूत फेक्टर के चलते बीनू कुशवाह या ओबीसी फेक्टर से भरत पोरवाल को टिकट मिल सकता है।

दो सप्ताह पहले टिकट की संभावना प्रबल, विरोध हुआ

करीब एक महीने पूर्व अचानक चेतन यादव की दावेदारी इतनी प्रबल हुई कि वे टॉप टू में शामिल हो गए। सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे कार्यकर्ताओं की मांग के साथ ही मुख्य कारण अरुण यादव का चेतन के लिए दमदारी से टिकट मांगना था। चर्चा है कि इसके लिए उन्होंने दिग्विजसिंह को भी मना लिया था। दो सप्ताह पूर्व ऐसा समय भी आया था कि चेतन यादव का टिकट लगभग तय मान लिया गया था लेकिन जिले के एक अन्य युवा नेता अपने समर्थक के नाम की पेरवी कर चेतन के नाम पर विरोध जताया। जीतसिंह और चेतन यादव की दावेदारी फिर एक-दूसरे से ऊपर-निचे होने लगी। इधर पूर्व विधायक डॉ. बटुकशंकर जोशी भी चेतन के टिकट के लिए प्रयासरत थे। भतीजे भरतशंकर जोशी का टिकट उत्तर से नहीं होने पर बटुकशंकर की ओर से भी चेतन के रूप में एक ही टिकट की मांग बची थी। गुरुवार शाम तक कुछ लोग चेतन तो कुछ लोग अजीत का टिकट फाइनल होने का दावा कर रहे थे। दोनों की दावेदारी के इतने उलझने के पीछे एक बड़ा फेक्टर बड़नगर विधानसभा भी था।

जोरदार स्वागत जैस टिकट की विजय यात्रा

उज्जैन दक्षिण के प्रत्याशी चेतन यादव शुक्रवार शाम दिल्ली से लौटे। शहीदपार्क से उनकी स्वागत रैली निकाली जाना थी जिसके लेकर पहले से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता यहां मौजूद थे। यहां पहुंच चेतन यादव ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उन्हें उठा लिया और जमकर नारेबाजी की। यादव ने आसपास के व्यापारियों से मुलाकात की। शहीद पार्क से देवासगेट कार्यालय तक स्वागत रैली निकली लेकिन इसमें लोगों की इतनी भीड़ थी कि यह टिकट विजय की यात्रा कहने लगने लगी। लंबे दौर तक चले स्वागत के बाद यादव महाकाल मंदिर पहुंचे और बाबा के सामने माथा टेका।

विक्रम विश्वविद्यालय बताता है कि कैसी कार्य प्रणाली है

करोड़ों रुपए के विकास कार्यों का दावा करने वाले मंत्री मोहन यादव से चुनावी मुकाबले के सवाल पर चेतन यादव ने कहा, जनता सब समझती है, उन्हें बताने की जरूरत नहीं है। केंद्र की या अन्य योजना को अपना बताने से क्या होगा, पब्लिक को इन बातों पर भरोसा कहां है। जानना ही है तो विक्रम विश्वविद्यालय की स्थिति को देख सकते हैं पूरी कार्यप्रणाली समझ आ जाएगी। पब्लिक स्वयं एनालिसि करती है। यादव ने बताया, शहर में विकास कार्य की अपार संभावना है। उज्जैन के विकास का लाभ उज्जैन के लोगों को रोजगार के रूप में भी मिले, यह महत्वपूर्ण हैं। सिर्फ निर्माण नहीं, योजनाबद्ध तरीके से निर्माण की जरूरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे कई मुद्दे है जिन पर कार्य करने की जरूरत है।

डीजे का साउंड तेज, समझाइश दी

स्वागत यात्रा के दौरान डीजे वाहन का भी उपयोग हुआ। नियमानुसार तय डेसीबल में ही ध्वजी विस्तारक यंत्र का उपयोग करने की अनुमति है। डीजे का साउंड अधिक होने पर पुलिस ने संबंधित को समझाइश देकर साउंड कम रखने का कहा।