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गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पंगारकर की बड़ी जीत, भाजपा भी नहीं दे सकी पटखनी

Gauri Lankesh murder accuse wins: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में आरोपी रहे श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज की है। श्रीकांत पंगारकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 16, 2026

Gauri Lankesh murder accuse Shrikant Pangarkar wins

गौरी लंकेश हत्याकांड का आरोपी श्रीकांत पंगारकर जीता (Photo: IANS)

महाराष्ट्र के 29 महानगरपालिका चुनावों के बीच जालना से एक चौंकाने वाला नतीजा सामने आया है। 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का आरोपी श्रीकांत पंगारकर जालना महानगरपालिका चुनाव में जीतकर नगरसेवक बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जालना नगर निगम के वार्ड 13 से चुनाव लड़ा और कड़े मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी को मात दी।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, श्रीकांत पंगारकर को कुल 2,661 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार रावसाहेब ढोबले को 2,477 वोटों पर संतोष करना पड़ा। दोनों के बीच जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा, लेकिन अंततः पंगारकर ने बाजी मार ली। यह परिणाम ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में एक साथ हुए निकाय चुनावों की मतगणना चल रही है। मुंबई के बीएमसी सहित 20 से ज्यादा महानगरपालिकाओं में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

यहां हो गया खेला!

खास बात यह रही कि श्रीकांत पंगारकर के खिलाफ भाजपा समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार उतारे, लेकिन एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने प्रत्याशी नहीं खड़ा किया। इसके बावजूद, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए पंगारकर ने जीत हासिल कर सभी को हैरान कर दिया।

बता दें कि महाराष्ट्र में नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले पंगारकर, शिवसेना में शामिल हो गए थे। हालांकि, विरोध के बाद, शिंदे ने पार्टी से उनकी सदस्यता को स्थगित कर दिया था।

कर्नाटक के बेंगलुरु में 5 सितंबर 2017 को पत्रकार व कार्यकर्ता गौरी लंकेश की उनके आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं और 2014 के बाद से देश में हुए राजनीतिक परिवर्तन की पृष्ठभूमि में उदारवाद, धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता पर एक तीखी बहस को जन्म दिया।

श्रीकांत पंगारकर 2001 से 2006 के बीच अविभाजित शिवसेना के सदस्य के रूप में जालना नगर परिषद के सदस्य रहे। जब 2011 में शिवसेना द्वारा उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला तो वे दक्षिणपंथी हिंदू जनजागृति समिति में शामिल हो गए।

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