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ठाकरे ही नहीं, पवार परिवार के गढ़ में भी खिला कमल, अजित दादा को लगा सबसे बड़ा झटका

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिका चुनावों के नतीजों में किसी में भी एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने में नाकाम रही है, जिससे मेयर का पद हासिल करने की उसकी संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 16, 2026

Ajit Pawar Vs BJP Pune Election

अजित पवार को भाजपा ने दिया बड़ा झटका (Photo: IANS)

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। उनके अपने ही गढ़ माने जाने वाले पुणे और पिंपरी-चिंचवाड में मतदाताओं ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को सिरे से नकार दिया है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ महानगरपालिका चुनावों में एनसीपी के उनके गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि भाजपा को प्रचंड जीत मिली। इस हार ने न केवल उनके राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी है, बल्कि राज्य की महायुति सरकार में उनके दमखम को भी काफी प्रभावित कर दिया है।

अजित पवार ने पुणे महानगरपालिका और पिंपरी-चिंचवाड महानगरपालिका में भाजपा से गठबंधन नहीं किया था। एक तरफ वे राज्य स्तर पर भाजपा के सहयोगी थे, वहीं स्थानीय स्तर पर भाजपा को रोकने के लिए उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के एनसीपी गुट (NCP SP) के साथ हाथ मिला लिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मतदाताओं ने इस विरोधाभासी गठबंधन को स्वीकार नहीं किया।

आक्रामक प्रचार और गठबंधन में दरार

अजित पवार ने चुनाव प्रचार के दौरान आक्रामक रुख अपनाते हुए स्थानीय भाजपा प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा जैसे बड़े वादों के बावजूद जनता का भरोसा जीतने में वे नाकाम रहे। उनके प्रचार अभियान का असर महायुति गठबंधन पर भी पड़ा है। राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसमें उन्होंने अजित पवार को गठबंधन में शामिल करने पर खेद व्यक्त किया है।

ताजा नतीजों के अनुसार, राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में से एक में भी एनसीपी (अजित पवार गुट) सबसे बड़ी पार्टी बनकर नहीं उभर सकी है। ऐसे में मेयर पद मिलना नामुमकिन ही है।

बीएमसी में भाजपा-शिंदे सेना का कब्जा

मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election) में इस बार सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। बहुकोणीय मुकाबले, विपक्षी महाविकास आघाड़ी में आपसी टकराव और साझा रणनीति के अभाव का सीधा फायदा भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) गठबंधन को मिला। अब तक आये रुझानों व नतीजों के अनुसार, बीएमसी के 227 वार्डों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा 90 से ज्यादा सीटों (सीटों) पर आगे है या जीत चुकी है। जबकि सहयोगी शिवसेना 30 सीटों के आसपास है। उधर, शिवसेना (उद्धव गुट) 57, कांग्रेस 15 और मनसे 9 सीटों पर सिमटती दिख रही है। बीएमसी में पहली बार भाजपा का मेयर बनने जा रहा है। पिछले 25 वर्षों से बीएमसी के मेयर पद पर उद्धव की शिवसेना का कब्जा रहा है।

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