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यहां उधार के भवनों में चल रही कुपोषण से जंग

जिले की 628 आंगनबाडिय़ों को नसीब नहीं खुद के भवन  

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होशंगाबाद. जिले में बच्चांे को कुपोषण से बचाने का काम उधार के भवनों में चल रहा है। जिन आंगनबाडि़यों के माध्यम से यह पूरा काम चल रहा है, उनमें मूलभूत सुविधाएं ही नहीं है। आंगनबाड़ी कंेद्र जिन हालातों मंे हैं, उनमें बच्चों का बैठना और खेलना भी मुश्किल हो रहा है। वही परियोजना अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। हालात ये हैं कि जिले में जितनी आंगनबाडि़यां संचालित हो रही हैं, उनमें से ५० फीसदी से ज्यादा के पास खुद के भवन ही नहीं हैं। वहीं कुछ भवन शासकीय स्कूल के भवनों में चल रहे हैं। जिन केंद्रों के पास खुद के भवन नहीं हैं, उन्हें जल्द ही भवन मिलने का आश्वासन दिया जा रहा है।

मूलभूत सुविधाआें से महरूम केंद्र- एकीकृत महिला बाल विकास परियोजना द्वारा जिले में कुपोषण से लडऩे के लिए हर साल बड़ा बजट खर्च किया जाता है। बावजूद उसके जिले में अब भी बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों में उनके खुद के भवन नहीं बन सके हैं। इन केंद्रों को किराए के भवनों में लगाकर बच्चों को कुपोषण के डेंजर जोन से बाहर लाने की कवायद हो रही है। जिन भवनों को विभाग ने किराए पर ले रखा है, उनकी हालत बहुत अच्छी नहीं है। किसी भवन मंे बदहाल शौचालय हैं।

यह है किराए का स्लेब- जिले में जितने आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं, उनका विभाग ने एक किराया तय कर रखा है। इसी मानक के हिसाब से उन केंद्रों को किराया भुगतान किया जाता है। विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में किराए के भवन का न्यूनतम स्लेब 1500 रुपए प्रतिमाह और अधिकतम किराया करीब 3500 रुपए प्रतिमाह निर्धारित कर रखा है। इस लिहाज से विभाग का किराए के नाम पर हर माह 10 लाख रुपए से लेकर करीब 22 लाख रुपए तक का बजट है। साल भर में किराए के नाम पर विभाग को 1 करोड़ 20 लाख रुपए से लेकर करीब 2.64 करोड़ रुपए तक खर्च करना होती है।
इनका कहना है...

1. अभी हम इस बारे में कुछ नहीं बता पाएंगे। इस बारे में हम चुनाव के बाद ही बात करेंगे।
संजय त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी होशंगाबाद