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ट्रैक पर बाघिन को देख डरे कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा तो रेलवे ने थमा दी मशाल

चितहरा से मझगवां के बीच बाघिन का मूवमेंट
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सतना

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Vikrant Kumar Dubey

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Updated: 18 Jan 2020, 11:08 AM IST

Employees sought safety due to fear of tigress

Employees sought safety due to fear of tigress

सतना. चितहरा से मझगवां के बीच रेलवे ट्रैक पर बाघिन सहित उसके शावकों को देखकर दहशत में आए ट्रैकमैनों ने विगत दिनों सुरक्षा व्यवस्था की मांग की तो रेलवे प्रबंधन ने सुरक्षा मुहैया कराने की बजाय ट्रैकमैनों को एक मशाल थमा दी। कर्मचारी अपनी नौकरी बचाने के लिए जान की जोखिम उठाकर मशाल के उजियारे में रेलवे ट्रैक पर पेट्रोलिंग कर रहे हैं। साथ ही प्रबंधन के इस अडि़यल रवैये से उनमें जमकर नाराजगी भी है।

टै्रक मैन रजनीश कुमार अपने सहायक नारायण गौतम (ठेकाकर्मी) के साथ 11-11 जनवरी की रात हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग पर चितहरा से मझगवां के बीच रिपीटर पोस्ट 160-90 पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। दोनों पेट्रोलिंग करते हुए किमी 1215/9 पर पहुंचे ही थे कि सामने बाघिन सहित उसके दो शावकों को देख उनके होश उड़ गए। किसी तरह जान बचाकर दोनों चितहरा स्टेशन पहुंचे। इसके बाद गुस्साए ट्रैकमैनों ने दूसरे दिन सुरक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर टूल-डाउन कर दिया था। तब रेलवे प्रबंधन ने सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया था।

महज एक कर्मचारी बढ़ाकर की खानापूर्ति

कर्मचारियों ने बताया कि रेलवे प्रबंधन सुरक्षा के मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। टूल डाउन करने के बाद भी पेट्रोलिंग के लिए सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा रही। सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर एक कर्मचारी बढ़ाया गया है। अब दो कर्मचारियों की बजाय तीन लोग पेट्रोलिंग कर रहे हैं। उस कर्मचारी की ड्यूटी हाथ में मशाल थमाने के लिए लगाई गई है। एक कर्मचारी आगे-आगे मशाल लेकर चलता है, पीछे दो ट्रैकमैन रेलवे ट्रैक की जांच करते हैं।

डर के कारण नहीं जांच पा रहे ट्रैक
कर्मचारियों ने बताया कि रेलवे प्रबंधन के सभी जिम्मेदारों तक टूल डाउन कर सुरक्षा उपलब्ध कराने की आवाज उठाई गई पर स्थानीय अधिकारी अडि़यल रवैया अपनाए हैं। एक मशाल के सहारे पेट्रोलिंग करने का दबाव बनाया जा रहा। पेट्रोलिंग के दौरान हर समय डर बना रहता है। डर के चलते ट्रैक की जांच भी बेहतर ढंग से नहीं कर पा रहे। नौकरी बचाने के लिए मजबूरी में जान जोखिम में डालनी पड़ रही। रेलवे प्रबंधन के इस रुख से कर्मचारियों में आक्रोश है।

एरिया मैनेजर ने काट दिया फोन

इस संबंध में एरिया मैनेजर मृत्युंजय सिंह से बात की गई तो उन्होंने बेतुका जवाब दिया। कहा कि हमारे एरिया में किसी भी कर्मचारी के मन में असुरक्षा का भाव नहीं है। सभी बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा के सवाल का एरिया मैनेजर जवाब तक नहीं दे पाए और फोन काट दिया।

पेट्रोलिंग के दौरान मिले सुरक्षा
वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के शाखा सचिव मुकेश मिश्रा ने कहा कि वन विभाग बार-बार रेलवे से बाघिन सहित शावकों के मूवमेंट की चर्चा कर रहा है। एेसी स्थिति में पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा मुहैया कराना रेलवे प्रबंधन की जिम्मेदारी है। किसी भी कर्मचारी की जान को जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए।

रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग जरूरी

ठंड के मौसम में तापमान में गिरावट होने से रेल फ्रैक्चर की आशंका बढ़ जाती है। हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में ट्रेनों का परिचालन होता है। एेसे में पेट्रोलिंग में लापरवाही से यात्रियों की जान जोखिम भरी हो सकती है लेकिन रेलवे के स्थानीय जिम्मेदार सूचना के बाद भी वन विभाग से सुरक्षा को लेकर सामंजस्य नहीं बना पाए हैं।