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सरकारी बीज पर किसानों को नहीं है विश्वास, खरीद रहे निजी कंपनी के बीज

गुणवत्ता को लेकर किसानों में संशय

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jalore agriculture#seeds#news

कृषि विभाग का सर्वे : निम्न गुणवत्ता के खाद-बीज से फसलों में खराबा

इटारसी. किसानों को कम कीमत में मिलने वाले सरकारी बीजों पर भरोसा नहीं है। किसान ज्यादा दाम देकर निजी कंपनियों के बीच खरीद रहे हैं। पिछले दिनों किसानों ने खरीफ की फसल की बोवनी की है। जब किसानों से इस बारे में जानकारी ली गई तो किसानों ने बताया कि सरकारी बीज विश्वसनीय नहीं है। अब तो दोनों मुख्य सीजन रबी और खरीफ की फसल की बोवनी के लिए निजी कंपनियों के बीज का उपयोग कर रहे हैं। इधर कृषि विभाग द्वारा अच्छी किस्म के बीज दिए जाने का दावा किए जाने के बावजूद क्षेत्र के किसान निजी कंपनियों के बीज का रुख कर रहे हैं।

प्रति हैक्टेयर मिल रहा २० क्विंटल - खरीफ सीजन में मुख्यत: धान और मक्का की बोवनी की गई है। अधिकांश किसानों ने मक्के के विदेशी बीज की बोवनी की है। इसका कारण यह है कि विदेशी बीज से प्रति हैक्टेयर २० क्विंटल तक का उत्पादन मिल रहा है जबकि देसी बीज से प्रति हैक्टेयर ५ क्विंटल उत्पादन मिलता है। इसी तरह धान में विदेशी वैरायटी ११२१ की बोवनी अधिकांश किसानों ने की है। जबकि सोसाइटियों में मोटी धान की पूसा वैरायटी उपलब्ध थी। धान के उत्पादन में डबल का अंतर है।
महंगा बीज खरीदते है -सोयाबीन सरकारी बीज ५२०० रुपए क्विंटल मिलता है जबकि निजी कंपनियों के बीज ६ हजार से ८ हजार रुपए क्विंटल मिलता है। धान के निजी कंपनी के बीज ९ हजार से १० हजार रुपए क्विंटल है जबकि सोसाइटी में ३ हजार रुपए क्विंटल का बीज मिल रहा था। इसी तरह मक्का का सरकारी बीज १५० रुपए किलो जबकि निजी कंपनी २३० से ३०० रुपए किलो में किसानों ने खरीदा है।

किसानों से खरीदती है समितियां - बीज उत्पादन समितियां लाभ कमाने के लिए किसानों से बीज खरीदकर उसे ग्रेडिंग करके बेच देती है। जिला पंचायत सदस्य बाबू चौधरी ने बताया कि ब्रीडर तो उत्पन्न ही नहीं हो रहे हैं। बीज समितियां से सोसाइटी में जो बीज उपलब्ध कराया जाता है उससे उत्पादन कम होता है ऐसे में किसान सस्ता बीज खरीदकर अपना नुकसान नहीं कराना चाहता इसलिए निजी कंपनी का बीज खरीदता है।