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राहुल गांधी को बंगला वापस मिलने पर रविकिशन ने बताया PM मोदी का बड़प्पन, कांग्रेस बोली- बंगला प्रधानमंत्री की संपत्ती नहीं

Rahul Gandhi: राहुल गांधी को सरकारी बंगला मिलने के बाद बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि यह पीएम मोदी की विशाल हृदयता है, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि सांसद का बंगला पीएम मोदी की निजी संपत्ति नहीं है।  

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 getting back bungalow Rahul Gandhi, Ravikishan told greatness  of PM

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी को मोदी सरनेम केस में राहत मिलने के बाद उनकी सांसदी वापस मिल गई। सांसदी वापस होने के बाद मंगलवार को उनका पुराना सरकारी बंगला 12 तुगलक लेन उन्हें फिर से आवंटित कर दिया गया। कांग्रेस नेता को बंगला वापस मिलने के बाद गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने इसे PM मोदी का बड़प्पन बताया। इसके बाद से कांग्रेस भाजपा पर हमलावर हो गई और कहा कि राहुल गांधी बंगला पीएम मोदी की निजी संपत्ति नहीं है।

पीएम मोदी का बड़प्पन- रवि किशन

राहुल गांधी को सरकारी बंगला मिलने के बाद बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि यह पीएम मोदी की विशाल हृदयता है, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि सांसद का बंगला पीएम मोदी की निजी संपत्ति नहीं है।

रवि किशन ने कहा, "यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़प्पन है, ये भारतीय जनता पार्टी सरकार की सोच देखिए कि राहुल गांधी कोर्ट से स्टे पर बाहर हैं, लेकिन फिर भी आपको बंगला दे दिया गया है। आप मानिये प्रधानमंत्री के कार्यों को... कभी तो आप उनकी कुछ चीजों की तारीफ कीजिए। कांग्रेस छोड़ कर आप लोगों की घमंडिया पार्टी बनाए हैं तब भी आपको साधुवाद है और नए बंगले के लिए आपको बहुत मुबारक।"

मेरा घर पूरा हिंदुस्तान है- राहुल गांधी

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2019 मोदी उपनाम केस में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगा दी, जिसके बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल कर दी गई। लोकसभा की हाउस कमेटी ने उनके बंगले को प्रोटोकॉल के मुताबिक दोबारा आवंटित कर दिया, जिसे उन्होंने अप्रैल में खाली कर दिया था। वहीं, राहुल गांधी ने 12 तुगलक लेन को दोबारा आवंटित किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मेरा घर पूरा हिंदुस्तान है।" बता दें कि राहुल गांधी 2004 में जब सांसद बने थे तब से ही वह 12 तुगलक वाले बंगले में रह रहे थे। अप्रैल 2023 में 18 साल बाद उन्होंने ये बंगला खाली किया था।

कैसे मिलता है सरकारी आवास?
साल 1992 में हाउसिंग और शहरी विकास मंत्रालय के अधीन डायरेक्टरेट ऑफ़ स्टेट्स (DoE) नाम का विभाग बनाया गया था। यह विभाग सांसदों को सरकारी बंगला आवंटित करता है। डायरेक्टरेट ऑफ़ स्टेट्स विभाग, जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन एक्ट, संक्षिप्त में GPRA एक्ट नियम के तहत बंगला अलॉट करता है। इसी नियम में बताई गई शर्तों और नियमों के मुताबिक, सरकारी लोगों को दिल्ली और उसके बाहर की भी कई लोकेशन पर सांसद को बंगले दिए जाते हैं। बता दें कि सांसदों के आवास देने की प्रक्रिया में DoE के अलावा लोकसभा और राज्यसभा की हाउसिंग कमेटी निर्णायक रोल निभाती है।

लोकसभा पूल में कुल 517 घर

लोकसभा पूल में कुल 517 घर हैं, इसमें टाइप-8 बंगले से लेकर छोटे फ्लैट और हॉस्टल भी शामिल हैं। आवास अलॉट करने की जिम्मेदारी हाउस कमेटी की होती है। सांसदों द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर हाउस कमेटी बंगले का आवंटन करती है। लोकसभा पूल के लिए उपलब्ध रिहायशी आवास में 159 बंगले, 37 ट्विन फ्लैट, 193 सिंगल फ्लैट, 96 बहुमंजिला इमारत में फ्लैट और 32 इकाइयां सिंगल घर के मौजूद है।

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