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Jaipur: दल बदल कर भाजपा में आए कांग्रेसी नेताओं की बढ़ी उलझन, सियासी वनवास से दल बदलने वालों में ‘घर वापसी’ की चर्चा तेज

जयपुर। राजस्थान में 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कई पुराने नेता इन दिनों राजनीतिक उलझन के दौर से गुजर रहे हैं।

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कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल नेता, पत्रिका फोटो

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल नेता, पत्रिका फोटो

जयपुर। राजस्थान में 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कई पुराने नेता इन दिनों राजनीतिक उलझन के दौर से गुजर रहे हैं। पार्टी और सरकार में अपेक्षित भूमिका नहीं मिलने, संगठनात्मक जिम्मेदारी से दूर रहने और निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी न मिलने के कारण ये नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर मंथन कर रहे हैं। चुनावी फायदा नहीं मिलने से भविष्य की राजनीति को लेकर ये नेता अब असमंजस की स्थिति में हैं।

ज्योति खंडेलवाल- तलाश अभी भी जारी

जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल, जिन्होंने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा जॉइन की थी, आज भी पार्टी में अपनी भूमिका तलाशती नजर आ रही हैं। उन्हें प्रदेश टीम में शामिल करने की चर्चा थी, लेकिन एक कथित वायरल सूची में नाम आने के बाद भाजपा महिला नेताओं के विरोध के चलते प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा में उनका नाम शामिल नहीं हो सका।

कटारिया और राजेंद्र यादव- हाशिये पर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थामा था, लेकिन वे भी फिलहाल किसी महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका में नजर नहीं आ रहे हैं। इसी तरह पूर्व मंत्री राजेंद्र यादव भी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। मिड-डे मील घोटाले में उनके पुत्रों पर लगे आरोपों ने उनके राजनीतिक भविष्य को और अनिश्चित बना दिया है।

मालवीया की घर वापसी से बढ़ी हलचल

विधायक पद छोड़कर भाजपा में गए महेन्द्रजीत सिंह मालवीया के कांग्रेस में वापस लौटने के बाद अन्य नेताओं में भी घर वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व पार्टी छोड़ चुके नेताओं के मामलों पर पुनर्विचार कर रहा है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के अनुसार, अनुशासन समिति सभी मामलों की समीक्षा कर रही है और अंतिम फैसला आलाकमान करेगा।

तीन की किस्मत खुली, 3 को मिली हार

आरएलपी छोड़कर BJP में आए रेवंतराम डांगा को पार्टी ने टिकट दिया और वे खींवसर से विधायक बन गए। कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व विधायक दर्शन सिंह गुर्जर भी विधानसभा पहुंचने में सफल रहे। वहीं, रमेश खींची ने कठूमर से चुनाव जीत लिया। दूसरी ओर ज्योति मिर्धा, गौरव वल्लभ और मालवीया चुनाव हार गए। मालवीया ने तो कांग्रेस विधायक रहते हुए इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन की थी और सांसद का चुनाव लड़ा था।

समर्थकों के साथ ये बड़े नेता हुए थे शामिल

भाजपा में शामिल हुए कई बड़े नेता अपने साथ बड़ी संख्या में समर्थकों को भी लेकर आए थे। इनमें पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया, राजेंद्र यादव, खिलाड़ीलाल बैरवा, रिछपाल मिर्धा, विजयपाल मिर्धा, रमेश खींची, आलोक बेनीवाल और गिर्राज सिंह मलिंगा शामिल हैं।

इसके अलावा भीलवाड़ा के पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष रामपाल शर्मा, जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल, खादी बोर्ड उपाध्यक्ष पंकज मेहता, कांग्रेस कोषाध्यक्ष रहे सीताराम अग्रवाल, रामनिवास मीणा, कांग्रेस सेवा दल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चौधरी और सुरेश मिश्रा भी भाजपा में शामिल हुए थे।

पूर्व सांसद करण सिंह यादव, चूरू से कांग्रेस के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी प्रताप पूनिया, अजमेर जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा, पूर्व विधायक सुरेश टांक, पूर्व जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर, पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल, महेंद्र सिंह गुर्जर, परम नवदीप और RLP के प्रदेश अध्यक्ष पुखराज गर्ग भी भाजपा में आए।

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