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बालाजी की गिरफ्तारी पर तुषार मेहता और रोहतगी में तीखी बहस, सॉलिसिटर जनरल ने मांगी पूछताछ की अनुमति

Chennai: मद्रास चेन्नई हाईकोर्ट में मंगलवार को माहौल उस समय गर्म दिखा, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी की वैधता पर समक्ष बहस की।

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चेन्नई हाईकोर्ट

तमिलनाडु के बिजली मंत्री सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी पर कल मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। केस की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के बीच मंगलवार को तीखी बहस हुई। हाई कोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई गिरफ्तारी को वैध या अवैध पर सुनवाई कर रही थी।

गिरफ्तारी से पहले ED को नोटिस देने की जरुरत नहीं
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हाईकोर्ट में तर्क दिया कि मंत्री की गिरफ्तारी से पहले ईडी को उन्हें नोटिस देने की जरूरत नहीं थी। रोहतगी ने सवाल किया कि क्या एजेंसी के पास एक शख्स को इस तरह से हिरासत में लेने का अधिकार है? इस पर मेहता ने कहा कि ईडी पुलिस नहीं है, इसलिए उसके पास किसी आरोपी की हिरासत मांगने का कोई अधिकार नहीं है।

सबूत मिटाने से बचाने के लिए गिरफ्तारी: मेहता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीएमएलए प्रावधानों के अनुसार किसी व्यक्ति को सबूत नष्ट करने से रोकने के लिए भी गिरफ्तार किया जा सकता है। न्यायमूर्ति जे निशा बानू और न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती की खंडपीठ बालाजी की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों पक्षों की 16 घंटे की बहस पूरी होने पर पीठ ने वकीलों को 28 जून तक अपना लिखित बयान जमा करने का निर्देश दिया है प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बालाजी को हिरासत में लेने के दौरान उनकी गिरफ्तारी का आधार नहीं बताने के बारे में सवालों का जवाब दिया।

15 दिनों से अधिक हिरासत में पूछताछ नहीं कर सकती
वहीं, तुषार मेहता के साथ बहस के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि हिरासत में पूछताछ की इजाजत देने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की अवधि को बाहर करने का कोई कानूनी प्रावधान उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, ‘चाहे भूकंप आए या महामारी, आरोपी की गिरफ्तारी के 15 दिनों से अधिक हिरासत में पूछताछ नहीं की जा सकती।

मंत्री की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित: मुकुल रोहतगी
उन्होंने तर्क दिया कि बालाजी के मामले में, 15 दिनों की अवधि 28 जून को समाप्त हो गई और इसलिए, प्रवर्तन निदेशालय हिरासत में पूछताछ का अनुरोध नहीं कर सकता है. पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि मंत्री की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका विचारणीय थी, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी और रिमांड ‘अवैध और राजनीति से प्रेरित’ थी।

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पूछताछ की अनुमति दे कोर्ट
सॉलिसिटर जनरल ने बहस के दौरान कहा कि अदालत को मंत्री के अस्पताल में भर्ती होने की अवधि को बाहर करना चाहिए और हिरासत में पूछताछ की अनुमति देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्र न्यायाधीश की लगाई गई शर्तें कि मंत्री से अस्पताल में पूछताछ की जानी चाहिए, ने पूछताछ को असंभव बना दिया है।