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जहां जाते हैं, वहां परिवर्तन के सूत्रधार बन जाते हैं गृहमंत्री अमित शाह

-देश में सबसे लंबे समय तक रहने वाले गृहमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं अमित शाह, आडवाणी और पंत रहे हैं 6 साल - 49 साल में भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके गृहमंत्री शाह के दूसरे कार्यकाल के सामने हैं कई चुनौतियां

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नवनीत मिश्र

नई दिल्ली। गृहमंत्री अमित शाह जहां जाते हैं, वहीं परिवर्तन के सूत्रधार बन जाते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल हो या फिर गृहमंत्री या खेल प्रशासक रहने का समय हो, हर जगह लीक से हटकर किए कार्यों से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। पिछले कार्यकाल में जम्मू कश्मीर से 370 हटाने के बाद तो उन्हें दूसरा लौहपुरुष भी कहा जाने लगा। आइपीसी, सीआरपीसी की विदाई कर और 3 नए आपराधिक कानूनों को बनाकर इतिहास रच चुके अमित शाह एक और रिकॉर्ड बनाने की ओर है। यह रिकार्ड है देश में सबसे लंबे समय तक गृहमंत्री रहने का। भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस के गोविंद बल्लभ पंत ही दो ऐसे नेता हैं, जो 6-6 साल तक गृहमंत्री रहे हैं। इस प्रकार इस कार्यकाल में शाह यह रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। यों तो गृहमंत्री अमित शाह के दूसरे कार्यकाल में कई चुनौतियां भी है। लेकिन, वे चुनौतियों में भी अवसर तलाशने वाले नेता माने जाते हैं।

2014 में 49 साल की उम्र में भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले अमित शाह को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 2019 में गृहमंत्री की जिम्मेदारी मिली और 2021 बने नए सहकारिता मंत्रालय की भी कमान मिली। पार्टी में रहे तो सबसे सफल राष्ट्रीय अध्यक्ष कहलाए और जब गृहमंत्री बने तो कड़े फैसलों से इतिहास रचने में सफल रहे।अहमदाबाद के नारनपुरा वार्ड में बूथ प्रबंधक के रूप में चुनावी राजनीति शुरू करने वाले शाह को 1997 में पहली बरा सरखेज विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का मौका मिला। फिर शाह ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज तक अपना हर चुनाव जीतते आए हैं।

गृहमंत्री का कार्यकाल

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना हो या फिर पूर्वोत्तर में शांति के लिए विद्रोही समूहों से समझौतौं के जरिए उनके हथियार डलवाना, इसमें उनकी नीति सफल रही। कश्मीर में 370 हटने के बाद आतंकवाद की घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई है। उधर,पूर्वोत्तर में उग्रवाद की घटनाओं में 68 प्रतिशत की कमी आई है।

सहकारिता के योद्धा

सहकारिता से शाह का पुराना नाता रहा है। यह शाह ही थे, जिन्होंने गुजरात में सहकारिता पर कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ा। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए भाजपा नेतृत्व ने 2001 में पार्टी के सहकारी प्रकोष्ठ का उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक बनाया था। शाह ने मृत पड़ चुके अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक और माधवपुरा बैंक, को जिंदा कर दिखाया था। 2021 में मोदी सरकार में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद शाह ने संसद में कानून बनाकर सहकारिता क्षेत्र में नई जान फूंक दी।

खेल प्रशासक

शाह खेल प्रेमी और शतरंज के शौकीन हैं। गुजरात क्रिकेट संघ में रहते हुए उन्होंने जहां खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया, वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में न केवल शतरंज को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कराया बल्कि शतरंज की अनूठी प्रतियोगिताओं का आयोजन कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक में भी स्थान दिलाया। 5 विश्वस्तरीय स्टेडियम का निर्माण करा चुके हैं।

गृहमंत्रालय के सामने चुनौतियां

  • मणिपुर में शांति बहाल
  • जम्मू-कश्मीर में विधासनभा चुनाव और पूर्ण राज्य की बहाली
  • तीनों नए कानूनों- भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को लागू करना
  • कोविड और चुनाव के कारण लंबित जनगणना को कराना

सहकारिता मंत्रालय के सामने चुनौतियां

  • सहकारी संस्थाओं की क्षमता वृद्धि
  • गुजरात की तरह अन्य राज्यों में भी सहकारिता क्रांति लाना
  • निवेशकों की गाढ़े पसीने की कमाई को वापस दिलाना
  • राज्यों में राजनीति या प्रबंधन के अभाव में मृतप्राय हो चुकीं सहकारी संस्थाओं को जिंदा करना