
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़ा घोटाला कहलाने वाला 2G घोटाले में सीबीआई ने चौंकाने वाला फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही है, इसलिए सभी को बरी किया जाता है। 2G घोटाला मामले में ए राजा , कनिमोझी समेत देश के कई बड़े कारपोरेट घराने के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। आब सीबीआई और ईडी इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगी।
'पहले आओ पहले पाओ' से दिए गए टेलिकॉम लाइसेंस
करीब 1.76 लाख करोड़ रुपए की इस घोटाले की 2008 में ही हो गई थी। महालेखाकार और नियंत्रक यानी सीएजी ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए टेलीकॉम स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए। जिसमें टेलिकॉम कंपनियों को नीलामी के बदले पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लाइसेंस आवंटित किए गए। जिसके बाद सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस तरह के नियमों की अनदेखी करके आवंटन देने से देश को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
इन कंपनियों की लाइसेंस हुए थे रद्द
सीएजी की रिपोर्ट के बाद लगातार बढ़ते विवाद के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिए । ये लाइंसेस 8 टेलीकॉम कंपनियों को दिए गए थे। जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द हुए थे उनमें वोडाफोन को छोड़कर आज के दौर में सबने अपना कारोबार समेट लिया है।
किस कंपनी को कितने लाइसेंस
कंपनी लाइसेंस
टाटा टेली 3
आइडिया 13
एस टेल 6
स्वान टेलिकॉम 15
लूप मोबाइल 21
यूनिटेक 22
सिस्टेमा श्याम 21
विडियोकॉन 21
किनके नाम थे शामिल
ये देश का पहला ऐसा घोटाला था जिसमें राजनेता, बड़े कारोबारी से लेकर कई बड़े ब्यूरोक्रेट के नाम शामिल थे। जिनमें ए राजा( डीमएमके नेता), कनिमोझी( डीमएमके नेता), आर के चंदौलिया (राजा के पूर्व सचिव), सिद्दार्थ बेहूरा (टेलिकॉम सचिव), रवि रुइया(चेयरमैन एस्सार ग्रुप), अंशुमान रुइया (डायरेक्टर एस्सार ग्रुप), लूप टेलिकॉम के आई पी खेतान और किरण खेतान, डीबी रियल्टी के शाहिद बलवा, यूनिटेक के संजय चंद्रा समेत कई ब्यूरोक्रेट्स के नाम शामिल थे।
किस कंपनी को कितने लाइसेंस
| कंपनी | लाइसेंस |
| टाटा टेली | 3 |
| आइडिया | 13 |
| एस टेल | 6 |
| स्वान टेलिकॉम | 15 |
| लूप मोबाइल | 21 |
| यूनिटेक | 22 |
| सिस्टेमा श्याम | 21 |
| विडियोकॉन | 21 |
Updated on:
21 Dec 2017 01:05 pm
Published on:
21 Dec 2017 12:36 pm
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