
saurabh kalia
नई
दिल्ली। मोदी सरकार, करगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के कैप्टन सौरभ कालिया एवं
तीन अन्य जवानों को पाकिस्तानी सेना द्वारा अमानवीय यातनायें देकर मारे जाने के
मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय अदालत ले जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की राय लेगी। विदेश
मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के एक प्रावधान
में कहा गया है कि राष्ट्रमंडल देश होने के नाते भारत एवं पाकिस्तान एक दूसरे के
खिलाफ युद्ध संबंधी मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में नहीं ले जा सकते हैं। लेकिन,
कैप्टन सौरभ कालिया का मामला एक अपवाद है।
उन्होंने कहा कि अब तक सभी
सरकारें भी कहतीं रहीं हैं कि राष्ट्रमंडल के सदस्य होने के कारण दोनों देश
अंतरराष्ट्रीय अदालत नहीं जाएंगे। लेकिन, अब सरकार ने तय किया है कि इस मामले पर
सुप्रीम कोर्ट की राय ली जाएगी। स्वराज ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट कहता है कि इस
मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जा सकते हैं तो सरकार निश्चित रूप से इस मुद्दे
को वहां ले जाएगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उसके अनुरूप अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमे की
तैयारी शुरू की जाएगी। वर्ष 1999 के करगिल युद्ध में 4 जाट रेजिमेंट के कैप्टन सौरभ
कालिया, सिपाही अर्जुनराम बसवाना, मुलाराम बीडियासर, नरेश सिंह सिनसिनवार, भंवरलाल
बागड़यिा और भीकाराम मुढ को पाकिस्तानी सैनिकों ने एक गश्त के दौरान पकड़ लिया था
और उन्हें बुरी तरह से यातना देकर मार डाला था।
युद्धबंदियों संबंधी जिनेवा
संधि का उल्लंघन करते हुए उनके कान में गर्म लोहे की छड़ें डाल कर पर्दे फाड़ दिए
थे, आंखें फोड़ दीं थीं और गुप्तांगों को काट कर अलग कर दिया था। उन्हें सिगरेट के
बटों से जलाया गया था। उनके दांत तोड़ दिए गए थे। अंगों के टुकड़े टुकड़ें कर दिए
थे। होंठ एवं नाक भी काट दी गई थीं।
Published on:
01 Jun 2015 09:24 pm
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