
नई दिल्ली। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हसन रिजवी ने मुस्लिम पक्ष को अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने से बचने की सलाह दी है। रिजवी ने कहा कि अगर मुस्लिम पक्ष पुनर्विचार याचिका दायर करेगा तो लोगों में ये दूरगामी संदेश जाएगा कि मुसलमान एक महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर बनने के रास्ते में रोड़ा अटका रहे हैं।
ऐसी धारणा न बने इसके लिए मुस्लिम पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गंभीरता से चिंतन करने की जरूरत है।
अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हसन रिजवी के मुताबिक़ ये समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले पूरे देश के हिंदुओं, मुसलमानों और यहां तक कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि अदालत का फैसला चाहे जो वो उसका सम्मान करेंगे।
हसन रिजवी ने कहा कि भारतीय मुसलमानों ने कभी ये नहीं कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट का फैसला तभी कबूलेंगे जब वो उनके पक्ष में होगा। इसलिए अगर अब वो पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे तो ऐसा लगेगा कि वो जानबूझकर हिंदुओं के सबसे पूज्य देवता राम का मंदिर बनने में अड़चन पैदा करना चाहते हैं।
हसन रिजवी ने ये भी कहा कि मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन को ठुकराने के बजाय उसे स्वीकार करके देश मे सांप्रदायिक सद्भावना का संदेश देना चाहिए।
Updated on:
25 Nov 2019 02:00 pm
Published on:
25 Nov 2019 01:58 pm

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