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हिंदू महासभा के संस्थापक के पुत्र थे सोमनाथ, पिता की राह पर चलने के बजाय वामपंथ को चुना

पिता की राह पर चलने के बजाए वामपंथ को राजनीतिक करिअर के रूप में चुना।

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Dhirendra Kumar Mishra

Aug 13, 2018

somnath

हिंदू महासभा के संस्थापक के पुत्र थे सोमनाथ, पिता की राह पर चलने के बजाय वामपंथ को चुना

नई दिल्‍ली। ऐसा बहुत कम होता है कि जो व्‍यक्ति धार्मिक रूप से कट्टरवादी हो उसी का बेटा धर्म में विश्‍वास न करने वाला हो जाए। कॉमरेड सोमनाथ चटर्जी का मसला कुछ वैसा ही है। बता दें कि अखिल हिंदू महासभा के संस्‍थापक निर्मल चंद्र चटर्जी उन्‍हीं के पिता थे। इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं। पर यही सच है कि हिंदू महासभा के संस्‍थापक का बेटा देश में वामपंथ का पुरोध बना और दुनिया भर में अपने पिता का नाम ऊंचा करने वाला बना। हालांकि इस बात की चर्चा की अब कोई खास अहमियत नहीं है। ऐसा इसलिए कि न तो निर्मल चंद्र चटर्जी इस दुनिया में हैं और न ही सोमनाथ दा। इसके बावजूद यह संयोग अपने आप में एक इत्तफाक से कम नहीं है।

पकड़ी वामपंथ की राह
आपको बता दें कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का आज 89 साल की उम्र में आज निधन हो गया। वामपंथ के इस पुरोधा के पिता निर्मल चंद्र चटर्जी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थापक-अध्यक्ष थे। बावजूद इसके उन्होंने पिता की राह पर चलने के बजाए वामपंथ को राजनीतिक करिअर के रूप में चुना। वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य थे और 10 बार सांसद रहे। उन्‍हें 1996 में उत्‍कृष्‍ट सांसद सम्‍मान से भी नवाजा गया।

पिता थे राष्‍ट्रवादी हिंदू
सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को बंगाली ब्राह्मण निर्मल चंद्र चटर्जी और वीणापाणि देवी के घर में असम के तेजपुर में हुआ था। उनके पिता एक प्रतिष्ठित वकील, और राष्ट्रवादी हिंदू जागृति के समर्थक थे। सोमनाथ चटर्जी वामपंथ के एकलौते नेता रहे जो लोकसभा अध्यक्ष के पद तक पहुंचे। हालांकि 2008 में यूपीए सरकार के परमाणु करार पर मतभेद के चलते लेफ्ट ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। पार्टी के तत्कालीन महासचिव प्रकाश करात चाहते थे कि सोमनाथ चटर्जी लोकसभा अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दें लेकिन चटर्जी इस पर राजी नहीं हुए। इसके बाद उन्हें पार्टी से उन्हें बाहर कर दिया गया।

ममता बनर्जी से देखना पड़ा था हार का मुंह
इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद वर्ष 1984 में जादवपुर में कांग्रेस की ममता बनर्जी से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसे अगर छोड़ दें तो वह बोलपुर लोकसभा क्षेत्र से लगातार जीतते रहे हैं। चटर्जी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत सीपीएम के साथ 1968 में की और वह 2008 तक इस पार्टी से जुड़े रहे। 1971 में वह पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 10 बार लोकसभा सदस्य चुने गए।

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