
करुणानिधि और जयललिता के बाद ऐसी होगी दक्षिण में भविष्य की सियासत, इन चेहरों पर रहेगी नजर
नई दिल्ली। दक्षिण की राजनीति के पितामह के रूप में अपनी पहचान बना चुके एम करुणानिधि अब हमारे बीच नहीं रहे। करुणानिधि के निधन के साथ ही उनके उत्तराधिकारी को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं। वहीं दक्षिण की राजनीति में एक साल पहले एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। साउथ के इन दो दिग्गज नेताओं को उनके समर्थकों ने भगवान का दर्जा दिया था। राजनीति के प्रमुख स्तंभों के बाद अब दक्षिण की सियासत का भविष्य एक नई करवट लेगा। भविष्य में करुणानिधि और जयललिता का कौन बन सकता है चेहरा, जनता किसको देगी अपने सबसे प्रिय नेताओं के बराबर का दर्जा आइए डालते हैं एक नजर...
दक्षिण की राजनीति में अब तक दो दिग्गजों एम करुणानिधि और जयललिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन दोनों ही जननेताओं के देहांत के बाद अब दक्षिण की राजनीतिक भविष्य में नए चेहरों पर सबकी नजर होगी। इन नए चेहरों में निश्चित रूप से मौजूदा राजनीतिक उनके उत्तराधिकारियों को तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है लेकिन इन सबके अलावा नए चेहरों पर निगाहें टिकी रहेंगी। इन नए चेहरों में सबसे बड़ा नाम हैं राजनीकांत और कमल हासन।
जी हां फिल्मों से राजनीति में हाल में कदम रखने वाले इन दोनों ही दिग्गजों के पीछे बहुत बड़ा जनसमूह खड़ा है। हाल में इन दोनों ही अभिनेताओं ने अपने राजनीतिक करियर को दक्षिण के लिए समर्पित कर दिया है। दक्षिण की राजनीति में इन दोनों दिग्गजों के आने से काफी बदलाव भी आ सकते हैं।
इसलिए करुणानिधि और जयललिता की जगह के दावेदार
रजनीकांत और कमल हासन भले ही राजनीति में नए हों लेकिन जिस तरह एम करुणानिधि और जयललिता ने फिल्मों की शौहरत के बीच राजनीति का दामन थामा था ठीक उसी तरह सिनेमा के इन जादूगरों ने भी जनसेवा के लिए सियासत में कदम रखा है। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि इन नेताओं को करुणानिधि और जयललिता के नए चेहरों के रूप में देखा जा सकता है।
स्टालिन के लिए बड़ी चुनौती
लगभग डेढ़ साल से डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एम के स्टालिन की क्षमता और ताकत की कड़ी परिक्षा हुई है। स्टालिन के नेतृत्व में ही डीएमके ने 2016 का विधानसभा चुनाव लड़ा और पार्टी को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा। यही नहीं साल २०१७ में जयललिता के निधन के बाद आर के नगर उपचुनाव में डीएमके प्रत्याशी की जमानत भी जब्त हो गई।
बीजेपी जमा सकती है पैर
तमिलनाडु की राजनीति में जब डीएमके लगातार दूसरा चुनाव हार गई थी और एआईएडीएमके भी जयललिता की मौत के बाद बिखर गई थी। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी राज्य की राजनीति में प्रवेश करने की संभावना तलाश रही थी। इस बार भी यही उम्मीदें हैं कि भाजपा मोदी रथ पर सवार होकर तमिलनाडु की राजनीति में अपने पैर जमाने में जुट जाए और हो सकता है दक्षिण की राजनीति का भविष्य भी भगवा रूप ले ले।
Published on:
08 Aug 2018 11:53 am
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