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केंद्रीय मंत्री पासवान ने दलितों के सम्मान को ठेस पहुंचने पर एनडीए से अलग होने के संकेत क्‍यों दिए?

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में दलितों के हित में सबसे ज्‍यादा काम हुए हैं। इतना काम पहले कभी नहीं हुआ।

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Dhirendra Kumar Mishra

May 06, 2018

paswan

नई दिल्‍ली। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने साफ शब्‍दों में संकेत दिया है कि अगर दलितों के सम्‍मान को ठेस पहुंचाने का काम हुआ तो एनडीए में बने रहने पर पुनर्विचार करेंगे। उन्‍होंने मीडिया से सीधी बातचीत में बताया कि हम किसी के बंधुआ मजदूर नहीं हैं। आपकी पार्टी 2019 में एनडीए का हिस्सा रहेगी या नहीं, के जवाब में उन्‍होंने कहा कि भाजपा को अपने सहयोगियों पर ध्यान देना देने की जरूरत है। हालांकि उन्‍होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हम एनडीए में बने रहेंगे। उसका विकल्‍प अभी कोई नहीं है। जहां तक सहयोगियों पर ध्यान देने की बात है, तो यह हमने नहीं, हमारे बेटे चिराग पासवान ने कही थी।

2019 में मोदी ही बनेंगे पीएम
पासवान ने कहा कि हम लोग बाबा साहेब के पदचिन्‍हों पर चलने वाले हैं। उन्‍होंने सबके सम्‍मान की बात कही है। जब सम्मान पर ठेस पहुंचती है, तो हम किसी के बंधुआ मजदूर तो नहीं हैं। इस मुद्दे पर हम किसी को छोड़ते नहीं हैं। किसी से नाराजगी भी नहीं रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद से अब तक देश में जितने भी काम हुए, उन सबकी तुलना की जाए तो पीएम मोदी का काम सब पर भारी है। आपको बता दें कि रामविलास पासवान को भारतीय राजनीति में गिने चुने दलित चेहरों में से एक हैं। वह कई दशकों से देश और बिहार की सियासत में खास जगह बनाए हुए हैं।

दलितों के हित में हुए सारे काम
उनसे जब यह पूछा गया कि पीएम मोदी सरकार के दौरान अंबेडकर की मूर्ति लगाने, उनके नाम पर योजनाओं का नाम रखना दलितों के नाम पर सांकेतिक राजनीति नहीं हैं क्या? इस पर उन्‍होंने जवाब दिया कि योजनाओं में जैसे जनधन योजना है, उसमें किसका खाता नहीं है। 100 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोगों का खाता नहीं था। आज उनका खाता खुल गया। मुद्रा योजना है, सवा लाख बैंकों को कहा गया कि आप प्रत्येक बैंक में से एक दलित महिला, एक दलित पुरुष को बिजनेसमैन बनाओ, फिक्की के मुकाबले में डिक्की आ गया है, जितने काम हुए हैं वो सारा का सारा गरीबों के हक में हैं।

दलितों का आक्रोश जायज
एससी/एसटी एक्‍ट पर दलितों के गुस्से के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दलित का गुस्सा जायज है। हमारी पीढ़ी और चिराग पासवान की पीढ़ी में बुनियादी अंतर है। हमारी पीढ़ी के लोग जुल्म को सह लिया करते थे। नई पीढ़ी के लोग इज्जत और सम्मान की जिंदगी जीना चाहते हैं। वो टूट सकते हैं, लेकिन झुकने को तैयार नहीं हैं। आजादी के बाद से जैसे-जैसे वक्त गुजर रहा है। बाबा साहब अंबेडकर के विचार मुखर होकर सामने आ रहे हैं।