प्रतापगढ़. जिले में विकास को लेकर भले ही लाख दावे किए जाते है। लेकिन प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित लांबा डाबरा पंचायत के कटारों का खेड़ा के राजस्व गांव खेरापाड़ा के लोग आजादी के 75 सालों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां गांव की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है।
यहां ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग तरस रहे हैं। ऐसे में यहां के ग्रामीणों में आक्रोश भी बढ़ रहा है। गांव के ही समाजसेवी पन्नालाल ने बताया कि यहां 300 परिवारों की आबादी वाले इस गांव में 2001 में एक सरकारी स्कूल तो खोला गया। लेकिन सुविधाओं के नाम पर आज भी यहां कुछ भी नहीं है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते और पानी के लिए मीलों का सफर तय करना यहां के रहवासियों की मज़बूरी बन चुकी है। सरकार हर साल करोड़ों रुपए पानी और सडक़ों के लिए खर्च करती है। लेकिन खर्च का असर खेरापाड़ा गांव में देखने को नहीं मिलता है। यहां पानी के लिए लोगों को पथरीले इलाकों में एक किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। पहाड़ी इलाका होने के कारण रास्ते भी ऊबड़-खाबड़ है। यहां गांव में यदि कोई बीमार हो जाए तो इस गांव में एम्बुलेंस भी नहीं पंहुच सकती है। ऐसे में गांव यदि कोई इमरजेंसी हो तो भी ग्रामीणों को काफी मश्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांग करने के बाद भी गांव में मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए कोई भी कदम सरकार और प्रशासन की और से कोई कदम नहीं उठाए जा रहे है।