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राजस्थान में इस जिले के अजवाइन की देश-विदेश में बढ़ रही है डिमांड, लेकिन ये आ रही बड़ी समस्या

Rajasthan News: जिले पहाड़ी इलाकों में वर्षों से बोई जाने वाली औषधीय फसल अजवाइन की खेेती से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। गत दो दशक से सोयाबीन की फसल ने जहां किसानों की आय की प्रमुख फसल हो चुकी है।

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प्रतापगढ़. Rajasthan News: जिले पहाड़ी इलाकों में वर्षों से बोई जाने वाली औषधीय फसल अजवाइन की खेेती से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। गत दो दशक से सोयाबीन की फसल ने जहां किसानों की आय की प्रमुख फसल हो चुकी है। ऐेसे में अजवाइन की फसल का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। हालात यह है कि जिले में बहुत कम खेतों में अजवाइन की फसल दिख रही है। जबकि प्रतापगढ़ जिले की अजवाइन की मांग देशभर के इलाकों में होती है। गौरतलब है कि प्रतापगढ़ जिले की जलवायु विभिन्न फसलों के लिए उत्तम माना गया है। ऐसे में यहां अजवाइन की फसल का उत्पादन भी होता है। यहां की अजवाइन की गुणवत्ता काफी अच्छी होती है।

इसी कारण यहां के अजवाइन की मांग भी देश के विभिन्न इलाकों के साथ विदेशों में भी होती है। यहां की अजवाइन की खुशबू और गुणवत्ता देश ही नहीं विदेश में भी अपना-अलग मुकाम रखती है। इसी का ही परिणाम है कि यहां की अजवाइन देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही अमेरिका, दुबई, मस्कट, यूके के साथ अन्य खाड़ी देशों में भी निर्यात की जाती रही है।

गत कुछ वर्षों से सोयाबीन व अन्य व्यावसायिक फसलों की बुवाई अधिक होने लगी है। इस कारण अजवाइन की बुवाई का रकबा कम होने लगा है। इससे उत्पादन भी कम होता जा रहा है। जबकि गत वर्षों से प्रतापगढ़ के अजवाइन की मांग बढ़ती जा रही है।

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गत वर्षों से मौसम की मार
अजवाइन की फसल में गत कुछ वर्षों से मौसम की मार पड़ने लगी है। इसका कारण यह है कि जिस समय अजवाइन की फसल पककर तैयार होती है। इसी दौरान मावठ और शीतलहर का दौर चलता है। जिससे फसल खराब हो जाती है। ऐसे में अजवाइन उत्पादक किसानों को नुकसान होने लगा है। ऐसे में अब अजाइन का रकबा कम होता जा रहा है।

वर्ष में एक ही फसल
अजवाइन की फसल एक वर्ष में एक ही बार हो सकती है। इसकी बुवाई अगस्त, सितंबर में होती है। जबकि पकने की अवस्था फरवरी होती है। ऐसे में किसानों को एक ही फसल ले सकते है। जिससे भी अब किसानों का रुझान कम हो रहा है।

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विदेशों में मांग, भावों लगातार उछाल
जिले में अजवाइन का उत्पादन कम होता जा रहा है। वहीं भाव बढ़ते जा रहे है। इस वर्ष यहां मंडी में अजवाइन के भाव नौ हजार से 17 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक हो गए है। प्रतापगढ़ जिले में अजावइन की फसल गुणवत्ता में श्रेष्ठ होती है। जिससे यहां के अजवाइन की मांग देशभर में अधिक रहती है। लेकिन उत्पादन कम होने से अब पूर्ति नहीं हो पा रही है। जगदीश सोढानी, मुख्य निर्यातक, कृषि मंडी प्रतापगढ़

कृषि उपज मंडी में गत पांच वर्षों में आवक की स्थिति
वर्ष - आवक
2017-18 -11508

2018-19 -12492

2019-20- 5883

2020-21- 8987

2021-22- 10565

2022-23 -8485