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प्रतापगढ़

बजरी माफियाओं ने वनकर्मियों को बंधक बनाकर किया जानलेवा हमला, वन विभाग के दस कर्मचारी घायल

वन विभाग की जीप के साथ 6 वनकर्मियों को बनाया था बंधक, अन्य घायलों में दो वनकर्मी सुबह मिले

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प्रतापगढ़. जिले के सीतामाता अभयारण्य में गत दिनों से अवैध गतिविधियां काफी बढ़ गई है। यहां हालात यह है कि वन माफिया हमले करने से भी नहीं चूकते है। यहां अभयारण्य में शनिवार रात को भी बजरी माफिया ने वन विभाग कर्मचारियों पर जानलेवा हमला किया और आधा दर्जन को बंधक बनाकर धारदार हथियारों से मारपीट की। सूचना पर पुलिस अधिकारी मय जाप्ते के मौके पर पहुंचे और बंधक बनाए गए घायल कर्मचारियों को छुड़ाया। इसके बाद सभी को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। जहां उपचार जारी है। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार कर आरोपियों के दो टै्रक्टर, चार बाइकें भी जब्त किए है। सीतामाता अभयारण्य के जाखम क्षेत्र के रेंजर सोमेश्वर त्रिवेदी ने बताया कि शनिवार देर रात को सीतामाता वन क्षेत्र के पाल पंचायत के वन क्षेत्र में नाकाबंदी की जा रही थी। इस दौरान वहां से गुजर रहे बजरी से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोका गया। इसपर बीट इंचार्ज दिलीप चरपोटा को बजरी माफिया ने अपना रुतबा दिखाते हुए खुद को धरियावद के जग्गूभाई की गैंग का होना बताया। ट्रैक्टर को रोकने पर जान से मारने की धमकी दी। ट्रैक्टर जब्त करने के प्रयास पर आरोपियों ने हमला किया और वहां से फरार हो गए। सूचना पर देर रात जब विभाग की टीम ने जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया तो बजरी माफिया गैंग के दो दर्जन से अधिक लोगों ने मिलकर जंगल के अन्य रास्तों से आकर वन विभाग की टीम पर धावा बोल दिया। आरोपियों ने वन कर्मचारियों के साथ मारपीट की और वनकर्मियों के जवानों को उन्हीं की जीप में बंदी बनाकर जंगल के बीच लेकर पहुंच गए। यहां वन कर्मियों के साथ मारपीट और उनके कपड़े उतार दिए। सूचना पर वन विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जहां चारों जवानों को बजरी माफिया के चंगुल से छुड़वाया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक आरोपी दूलेश पुत्र भगड़ा मीणा निवासी पांचागुड़ा को गिरफ्तार किया। सभी घायलों को जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ लाया गया। जहां सभी को भर्ती कराया गया। जहां उपचार जारी है। घटना की जानकारी के बाद सीतामाता अभयारण्य सहायक वन संरक्षक सुनीलकुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे। जहां से घायल वनकर्मियों से जानकारी ली। इस संबंध में देवगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है। वहीं दो वनकर्मी सुबह जंगल में अपने आप को बचाते हुए चौकी पहुंचे। जहां से जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
हमले में यह हुए घायल
वन विभाग के नौ कर्मचरी घायल हुए है। इनमें सीताराम पुत्र नानाराम गरासिया निवासी बेकरिया उदयपुर, कमलेश पुत्र नारूलाल मेघवाल खेमपुरा उदयपुर, नवीन पुत्र कन्नीराम मीणा निवासी मांडकला धरियावद, नारायण पुत्र भीमजी मीणा निवासी सुरपुरए पीपलखूंट, दीपक पुत्र मोहन मीणा बागीदोरा, बांसवाड़ा, नगजी पुत्र गंगाराम रोत निवासी जोतड़ी डूंगरपुर, मोहन पुत्र फूलजी मीणा निवासी सुहागपुरा, रमणलाल पुत्र मोहन मीणा निवासी धरियावद, करण पुत्र गट्टू मीणा निवासी धरियावद घायल हुए है।
तीन माह में तीसरा हमला
यहां सीतामाता अभयारण्य में गत तीन माह में वनकर्मियों के साथ मारपीट का यह तीसरा मामला है। एसीएफ सुनीलसिंह ने बताया कि दो माह पहले भी माफिया ने धरियावद रेंज में मारपीट की थी। वहीं एक माह पहले अभयारण्य में दो वनकर्मियों के साथ मारपीट की गई थी।


जीप समेत बंधक बनाकर किया जानलेवा हमला
अभयारण्य में वन माफिया का आतंक काफी बढ़ गया है। यहां रात को भी बजरी से भरे दो ट्रैक्टर पकडऩे के दौरान माफिया ने वनकर्मियों को बंधक बनाकर जानलेवा हमला किया। जिसमें दस कर्मचारी घायल हुए है। सूचना पर वन विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जहां से बंधक बने कर्मचारियों को छुड़ाया गया। सभी का उपचार जारी है। देवगढ़ थाने में प्रकरण दर्ज कराया गया है। पुलिस की ओर से वन विभाग के सहयोग से आरोपियों की तलाश की जा रही है।
सुनीलकुमारसिंह, सहायक वन संरक्षक, सीतामाता अभयारण्य