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विश्व रक्तदान दिवस: रक्तदान को लेकर जागरूकता की कमी

आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में आज भी कई भ्रांतियां है। ऐसे में रक्तदान जैसे पुनित कार्य को लेकर भी कई प्रकार की भ्रांतियां आज भी लोगों के मन में है।

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कई बार नहीं मिलता है आवश्यकता पर रक्त
युवाओं को आगे आने की जरुरत
प्रतापगढ़. आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में आज भी कई भ्रांतियां है। ऐसे में रक्तदान जैसे पुनित कार्य को लेकर भी कई प्रकार की भ्रांतियां आज भी लोगों के मन में है। इससे कई बार आवश्यकता होने पर भी मरीजों को रक्त की उपलब्धता नहीं हो पाती है। इस कारण जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में आवश्यकता होने पर पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध नहीं होना मरीजों और परिजनों के लिए भारी पड़ जाता है। रक्त की उपलब्ध नहीं होने से न केवल चिकित्सकों के सामने समुचित उपचार करने में परेशानी आती है, बल्कि मरीजों को उदयपुर अथवा अन्य स्थानों पर जाना पड़ रहा है। रक्तदान को लेकर फैली भ्रांति से यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
गौरतलब है कि जिले में रक्तदान के लिए चिकित्सा संस्थानों के साथ कई स्वयंसेवी संगठनों की ओर से कई प्रयास किए जा रहे है। आवश्यकता पर रक्तदान शिविर लगाए जाते है। आमजन को जागरुक भी किया जाता है। इसके बाद भी लोगों में भ्रांतियां होने से रक्तदान नहीं करना चाहते है। इसका असर यह हो रहा है कि जिला चिकित्सालय में सभ्ीा प्रकार के ग्रुप के रक्त की उपलब्धता नहीं हो पाती है। ऐसे में इमरजेंसी में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कई बार परिजन भी नहीं देते रक्त
यहां ब्लड बैंक में रक्त की कमी का प्रमुख कारण जागरूकता का अभाव है। जिला चिकित्सालय में भर्ती रोगियों को रक्त की आवश्यकता होने पर कई बार उनके परिजन भी दूर भाग जाते हैं। आवश्यकता होने पर जहां लोग रक्तदाता ढंूढते है। वहीं रिप्लेसमेंट के लिए परिजनों को रक्तदान के लिए कहा जाता है। ऐसे में कोई ना कोई बहाना बनाकर परिजन ही रक्तदान से इंकार कर देते है। ऐसे में रक्त उपलब्ध कराना चिकित्सा प्रशासन के सामने चुनौती बन जाता है। गौरतलब है कि जिले में रक्तदान से शरीर में कमजोरी आना सबसे बड़ी भ्रांति है। जबकि चिकित्सा सूत्रों के मुताबिक शरीर में एक यूनिट रक्त २४ घण्टों में पुन: तैयार हो जाता है। वर्तमान में १०२ यूनिट, लेकिन ए पॉजीटिव की कमी
यहां जिला चिकित्सालय में वर्तमान में १०२ यूनिट हे। लेकिन इसमें से ए पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड नहीं है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. दिलीपकुमार ने बताया कि इस वर्ष अब तक जिले में १८ शिविर लगाए जा चुके है। इनमें ८३६ यूनिट रक्तदान किया गया है। वहीं जिला चिकित्सालय में अब तक ७९७ यूनिट रक्तदान किया गया है।
ब्उल बैंक की टीम रहती है तैयार
यहां ब्लड बैंक की टीम कभ्ीा शिविर के लिए तैयार रहती है। यहां ब्लड सेंटर टीम में संतोष चौहान, सुभाष मीणा, हम्तियाज हुसैन, गणपतङ्क्षसह, रवि पाटीदार, केशव प्रकाश, संगीता मीणा, पूजा खटीक, राजकुमारी रक्तदान शिविर में सेवाएं देते है।
जिला चिकित्सालय में गत वर्षों की स्थिति
वर्ष शिविर में कुल यूनिट रक्तदान
२११२ ५२७ १३६१
२०१३ ३८२ १५७६
२०१४ ४२२ १४६६
२०१५ ७६८ १७३६
२०१६ ६५६ २३१६
२०१७ १३५१ २५६९
२०१८ १४१४ ३०२६
२०१९ २५०० ४१८१
२०२० २०७४ ४०६४
२०२१ १५३६ ३९९९
२०२२ २४६० ३९५२
२०२३ ८३६ १६३३
(आंकड़े जिला चिकित्सालय की ब्लड बैंक से, वर्ष २०२३ में १३ जून तक आंकड़े)
किया जा रहा है प्रयास
यहां जिले में स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर काफी भ्रांतियां है। इससे कई बार काफी परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि हम अपने स्तर पर जागरूकता का प्रयास करते हैं। लेकिन कईबार हालता विकट हो जाते है। ऐसे में रक्तदान के लिए लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा। ब्लड बैंक में रक्त की पूर्ति के लिए जिले के विभिन्न संगठनों के माध्यम से शिविर आयोजित कराए जाते हैं। इन शिविरों में कुछ पूर्ति हो जाती है।
डॉ. दिलीप कुमार, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़