
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजा भैया को इस बार जोर का झटका धीरे से नहीं, जोर से ही लगा है।
Raja Bhaiya in Trouble: प्रतापगढ़ में किंग ऑफ कुंडा के नाम से फेमस राजा भैया को साल 2013 में हुई CO जिया-उल-हक हत्याकांड में पिछले साल हाई कोर्ट की तरफ से बिग रिलीफ मिली थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है और जांच करने का आदेश दिया है।
सबसे पहले जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा है…
सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम निर्णय में दिया इन्वेस्टिगेशन आर्डर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि CBI इस मामले में राजा भैया की कथित भूमिका की इन्वेस्टिगेशन करे। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और बेला माधुर्य त्रिवेदी की पीठ ने यह भी कहा है कि CBI तीन महीने में मामले की जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंपे।
राजा भैया को इस बार जोर का झटका धीरे से नहीं, जोर से ही लगा है
CBI इस मामले पर पहले से ही जांच कर रही है। ट्रायल में क्लोजर रिपोर्ट भी दायर की थी। एजेंसी ने CO की हत्या में 14 लोगों को आरोपी बनाया था। लेकिन, रिपोर्ट में राजा भैया का नाम नहीं था। साफ-साफ शब्दों में कहें तो राजा भैया को CBI की तरफ से क्लीन चिट दे दी गई थी। ट्रायल कोर्ट कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज करते हुए जांच जारी रखने का आदेश दिया था।
पिछले साल हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था ट्रायल कोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल ट्रायल कोर्ट के जांच जारी रखने के आदेश को रद्द कर दिया था और CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मान्यता दी थी। इसके बाद जिया-उल-हक की पत्नी परवीन आजाद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
परवीन ने कोर्ट में सीबीआई पर आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर राजा भैया की भूमिका की ओर इशारा करने वाले फैक्ट्स की अनदेखी की गई। सुनवाई पूरी होने के बाद राजा भैया को जोर का झटका इस बार जोर से ही लगा है। ऐपेक्स कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए लोअर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
अब तक आपने डीएसपी हत्याकांड में हुई अब तक की जांच पड़ताल और कोर्ट के फैसले को पढ़ा। आइए अब आपको 10 साल पुराने, दिल दहला देने वाले उस घटना के फ्लैशबैक में ले चलते हैं, जिसने अखिलेश यादव सरकार के कानून व्यवस्था पर बट्टा लगा दिया था
तारीख: 2 मार्च, साल: 2013, जगह: यूपी के प्रतापगढ़ जिले का बलीपुर गांव। यह दिन प्रतापगढ़ के क्राइम हिस्ट्री में ‘ब्लैक सटरडे’ के तौर ओर जाना जाएगा। मामला है कुंडा सर्किल के हथिगवा इलाके में बलीपुर गांव का। शाम के लगभग साढ़े सात बज रहे थे। गांव के प्रधान नन्हे यादव की चुनावी रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से प्रधान के घर वालों समेत मौके पर मौजूद भीड़ गुस्सा गई। मर्डर का आरोप लगा गांव के ही कामता पाल पर।
प्रधान के घरवालों ने कामता पाल के घर पर अटैक कर दिया। उन्होंने कामता के घर में आग लगा दी। गुस्साई भीड़ हत्या के दूसरे आरोपी संजय सिंह उर्फ गुड्डू के घर जा रही थी उस समय रत के 11 बज चुके थे। सूचना पाकर तत्कालीन CO कुंडा जिया-उल-हक मौके पर पहुंचे।
CO को पीट-पीट कर बंदूक से मार दी गोली
वहां पहुंचने के बाद जिया-उल-हक गुस्साए लोगों को आगे बढ़ने से रोकने लगे। मारे गए प्रधान के भाई सुरेश यादव ने बंदूक की बट उनके सिर पर मर दिया। अचानक से हुए हमले से CO गिर गए। इस दौरान बंदूक की छीना-झपटी हुई और गोली चल गई। गोली लगी सुरेश यादव को। सुरेश की ऑन द स्पॉट मौत हो गई।
बैक टू बैक दो मर्डर से भीड़ और गुस्सा गई, बौखला गई। गुस्साई भीड़ ने CO को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। उससे भी गुस्सा शांत नहीं हुआ तो गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। मॉब लिंचिंग में CO की हत्या ने पूरे यूपी के कानून व्यवस्था में भूचाल ला दिया। कानून की पोल पट्टी खोल कर रख दी।
पत्नी परवीन के अप्लीकशन पर दर्ज हुआ राजा भैया समेत 5 पर FIR
बलीपुर गांव में हुए ट्रिपल मर्डर में कुल चार FIR दर्ज कराई गई थी। सबसे लास्ट में CO जिया-उल-हक की पत्नी परवीन की ओर से FIR दर्ज कराई गई थी इसमें 5 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिनके नाम हैं गुलशन यादव, हरिओम श्रीवास्तव, रोहित सिंह, संजय सिंह उर्फ गुड्डू और रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया। इन पांचों पर IPC की धारा 147, 148, 149, 302, 504, 506, 120B और CLA एक्ट की धारा 7 के तहत केस दर्ज कराया गया था।
चौतरफा घिरने पर सपा के ताकतवर मंत्री को देना पड़ा 2 दिन में इस्तीफा
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। सरकार के मुखिया के तौर पर मुख्यमंत्री के कुर्सी पर बैठे थे अखिलेश यादव। सरकार बनने के बाद जब मंत्रालय का बंटवारा हुआ अखिलेश यादव सरकार में किंग ऑफ कुंडा यानी राजा भैया भैया खाद्य और रसद विभाग के मंत्री बने।
राजा भैया की प्रतापगढ़ और उसके आस पास के जिलों में कितनी हनक है, कितना रौला है। इसपर बहुत कहानियां छपी हैं। करोड़ों लोगों ने उसे पढ़ा है। लेकिन, यूपी पुलिस के DSP जिया-उल-हक कि हत्या में उनका नाम आने के बाद उनको घटना के मात्र 2 दिन बाद यानी 4 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा। राजा भैया तबके मंत्रिमंडल में सबसे ताकतवर मंत्रियों में से एक थे। सरकार में उनकी खूब चलती थी, सुनी भी जाती थी। सीधा-सीधा कहें तो तूती बोलती थी।
Updated on:
27 Sept 2023 09:44 pm
Published on:
27 Sept 2023 09:43 pm

बड़ी खबरें
View Allप्रतापगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
