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प्रशासन को सताया बाढ़ का डर, बुलाए गए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन 

आपदा प्रबंधन कछारी क्षेत्रों का कर रहा मुआयना...

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Jyoti Mini

Jul 20, 2016

Flood

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इलाहाबाद. गंगा के मैदानी क्षेत्र में बादलों का रंग देख प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए हैं। मैदानी इलाकों में बारिश हुई तो संगम क्षेत्र में रहने वालों का रहना मुश्किल हो जाएगा। बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन लगतार आपदा राहत टीम द्वारा मुआयना कर रहा है।

पिछले दिनों हुई बारिश से गंगा-यमुना के जल स्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई थी। इसके कारण संगम क्षेत्र में रहने वाले कई लोगों का आशियाना उजड़ गया। इसबीच बारिश थम जाने से गंगा-यमुना का जल स्तर थोड़ा घट गया है। वहीं मंगल को आसमान में बादलों के तेवर को देख कलेक्टर संजय कुमार ने राष्ट्रीय आपदा राहत की टीम को बुलावा लिया है।

इस टीम ने उन कछारी क्षेत्रों का मुआयना शुरू कर दिया है। जहां 2013 में बाढ़ की स्थिति आ गई थी। कछारी क्षेत्र में लोगों का जनजीवन अस्तव्यथ हो गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए नदियों के जल स्तर की निगरानी भी कराई जा रही है। हालांकि पिछले चार दिनों में जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।

इलाहाबाद में अब भी गंगा-यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से पांच मीटर अब भी नीचे है। लेकिन प्रशासन की निगाहें उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में होने वाली बरसात पर टिकी हैं। क्योंकि अगर वहां बरसात हुई तो विभिन्न नदियों का पानी गंगा-यमुना में ही आकर मिलेगा। इसके कारण यहां का जल स्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी। इससे बाढ़ का तांडव इलाहाबाद व आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।

ग्रामीणों को राहत, शहर में आफत
बारिश ने किसानों को भले ही बड़ी राहत दी हो। लेकिन शहरवासियों के लिए मुसीबत पैदा हो गई है। मुट्ठीगंज में सीवर बिछाने के नाम पर खोदी गई सड़के बदहाल हो गई हैं। मरम्मत के लिए खोदी गईं सड़कों से गुजरा लोगों का मुश्किल हो गया है। सुलेमसराय, धूमनगंज, राजरूपपुर, कीडगंज, अलोपीबाग, टैगोरटाउन सहित अन्य जगहों की सड़कों पर कीचड़ ही कीचड़ है। लोगों का इन रास्तों से गुजरना मुश्किल हो गया है।