4 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘अमेरिका का प्लान फेल, ईरान में राजद्रोह खत्म’…सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा बयान, ट्रंप को बताया क्रिमिनल

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर विद्रोह भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश ने साजिश को नाकाम कर दिया है। हालात सामान्य होने पर स्कूल और सेवाएं फिर से शुरू की जा रही हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Himadri Joshi

Jan 18, 2026

Shias in Bhopal mourn the death of Ayatollah Ali Khamenei

Shias in Bhopal mourn the death of Ayatollah Ali Khamenei - File Pic

ईरान में बीते कुछ हफ्तों से जारी राजनीतिक और सामाजिक अशांति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। आर्थिक असंतोष से शुरू हुए प्रदर्शन बाद में हिंसक रूप ले बैठे, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल उठे। इस प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों की जान गई और देश में सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा हो गई। अपनी सत्ता बचाने के लिए ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा देने का फैसला लिया। इसके बाद अब दावा किया जा रहा है कि ईरान में प्रदर्शन पर काबू पा लिया गया है। खामेनेई ने ही यह दावा करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल समर्थित विद्रोह को देश ने पूरी तरह पराजित कर दिया है।

अमेरिका पर गंभीर आरोप, इजरायल का नाम भी शामिल


अपने संबोधन में अयातुल्ला अली खामेनेई ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल पर ईरान में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और तेल अवीव ने देश को भीतर से कमजोर करने की साजिश रची थी, लेकिन ईरानी जनता और सुरक्षा बलों ने इसे नाकाम कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इस तथाकथित विद्रोह का मकसद ईरान को निगल जाना था। खामेनेई ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को क्रिमिनल बताते हुए उन्हे हिंसा और जानमाल के नुकसान का जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने खुले तौर पर दंगाइयों को समर्थन दिया।

प्रदर्शन, गिरफ्तारियां और सुरक्षा कार्रवाई

ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए प्रदर्शन आर्थिक समस्याओं को लेकर थे, लेकिन बाद में ये हिंसक हो गए। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध को कुछ असामाजिक तत्वों ने हाईजैक कर लिया। ईरानी सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हालात पर काबू पाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई और करीब 3000 लोगों को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देश के भीतर और बाहर से अशांति फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो सख्त सजा दी जाएगी।

हालात सामान्य, स्कूल और सेवाएं बहाल

सरकार के अनुसार अब ईरान में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। तनाव कम होने के साथ ही मोबाइल मैसेजिंग सेवाएं फिर से शुरू कर दी गई हैं। एक सप्ताह के बंद के बाद स्कूलों को दोबारा खोलने का फैसला लिया गया है, जिससे आम जनजीवन पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बीच लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन ने भी ईरान के समर्थन में बयान दिया और उसे प्रतिरोध का मजबूत गढ़ बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने जी7 देशों की टिप्पणियों को आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।