
कोर्ट के बजाय राजनीति में आजमा रहे किस्मत
इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक वकील के नाम पंजीकरण व एडवोकेट रोल नंबर पर वकालत कर रहे बांदा के जितेन्द्र कुमार सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आरोपी को दो माह का समय दिया है ताकि वह आदेश के खिलाफ विधिक अनुतोष प्राप्त कर सके। कोर्ट ने महानिबंधक को निर्देश दिया है कि वह दो माह बीतते ही कोई रोक न होने की दशा में सक्षम न्यायालय के क्षेत्राधिकार में प्राथमिकी दर्ज कराये।
जितेन्द्र कुमार सिंह नाम के वकील का एडवोकेट रोल व बार कौंसिल के पंजीकरण संख्या के आधार पर आरोपी जितेन्द्र कुमार सिंह ने एक हजार एक से अधिक मुकदमे हाईकोर्ट में दाखिल किए। उसे यह मालूम था कि वह दूसरे वकील का पंजीकरण व एडवोकेट रोल का इस्तेमाल कर रहा है। फाइल कवर व वकालतनामे पर भी उसने दूसरे का नंबर व पता छपवाया है। कोर्ट ने अपीलार्थी राम गोपाल को नोटिस जारी कर एक माह में अपना दूसरा वकील नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा तथा न्यायमूर्ति इफाकत अली खान की खण्डपीठ ने राम गोपाल की लीव टू अपील अर्जी पर दिया है। मालूम हो कि 29 अगस्त 18 को जब अर्जी पर बहस शुरू हुई तो अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार सिंह ने कोर्ट में आपत्ति की कि उन्होंने यह मुकदमा दाखिल नहीं किया है।
बहस कर रहे जितेन्द्र कुमार सिंह ने पहले तो गुमराह करने की कोशिश की और बार कौंसिल द्वारा जारी अपना परिचय पत्र दिखाया किन्तु बाद में स्वीकार किया कि उसके पास रोल नहीं है। कोर्ट ने उनके वकालत करने पर रोक लगाते हुए महानिबंधक को जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। विशेष कार्याधिकारी शेषमणि ने विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की जिसमें आरोपी के संबंध में कई खुलासे हुए। सील कवर में पेश रिपोर्ट को कोर्ट ने पत्रावली के साथ सीलकवर में महानिबंधक को सुपुर्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि बिना एडवोकेट रोल के कोई हाईकोर्ट में वकालत नहीं कर सकता। बिना अनुमति दूसरे के रोल पर वकालत करना कोर्ट को धोखा देना है जो अपराध है। दूसरे वकील के नाम, रोल पर वकालत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है और दो माह बाद एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।
By- Court Corrospondence
Published on:
19 Sept 2018 09:45 pm

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