
इंद्रजीत सरोज के सपा में जाने से बढ़ सकती है भाजपा व बसपा की मुश्किलें
प्रसून पाण्डेय
इलाहाबाद. यूपी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में भगदड़ थी। बहुजन समाज पार्टी के नवरत्न व स्तंभ कहे जाने वाले बसपा सुप्रीमो और पार्टी का साथ छोड़ रहे थे, जो अभी तक बरकरार है। इसी क्रम बसपा के कद्दावर नेता व पार्टी महासचिव रहे इंद्रजीत सरोज गुरूवार को समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिए। पूर्व मंत्री इं्रद्रजीत सरोज के साथ आठ पूर्व विधायक और 15 पूर्व प्रत्याशी भी सपा में शामिल हुए। यह बसपा सुप्रीमो की नाकामी है या विपक्षियों का मजबूत होना। यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। लेकिन फिलहाल फूलपुर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को देखते हुए भाजपा व बसपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जिले की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण दिन है। जिले में या कह सकते हैं कि जिले के आसपास के इलाकों में भी दलित चेहरे के रूप में एक बड़े नेता की पहचान रखने वाले बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता व पार्टी महासचिव रहे इंद्रजीत सरोज आज समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिए। इंद्रजीत सरोज का समाजवादी पार्टी में जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दलितों व पिछड़ों पर इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
इंद्रजीत सरोज का सपा में जाना भाजपा के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है। पिछड़ों के नाम पर पार्टी को एकजुट करने की कवायद में जुटे प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गृहनगर से ही इंद्रजीत सरोज भी आते हैं। साथ ही राजनीतिक रूप से जितनी पकड़ कौशांबी, मंझनपुर व इलाहाबाद में केशव प्रसाद की है, उतनी ही पैठ इंद्रजीत सरोज की भी मानी जाती है। यही कारण है इंद्रजीत सरोज मंझनपुर से चार बार विधायक भी रह चुके हैं।
माना जा रहा था कि इंद्रजीत सरोज बसपा का दामन छोड़ कमल का फूल खिलाएंगे। साथ ही यह भी उम्मीद लगाई जा रही थी कि वह, केशव प्रसाद मौर्य से खाली हुई फूलपुर की लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में प्रत्याशी बन सकते हैं। लेकिन सारे कयासों से आगे इंद्रजीत सरोज ने समाजवादी पार्टी में जाने का निर्णय लिया। तात्कालिक रुप से भले ही इंद्रजीत सरोज का समाजवादी पार्टी में जाना एक राजनीतिक दल बदल जरूर हो, लेकिन आने वाले समय में सपा को दलित वोटों का एक बड़ा जत्था इंद्रजीत सरोज के माध्यम से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज के साथ बसपा की कई बड़े चेहरे समाजवादी पार्टी का दामन थामे, जिनमें से आठ पूर्व विधायक और 15 पूर्व प्रत्याशी शामिल हैं। इन लोगों को समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव पार्टी की सदस्यता दिलाई। उक्त सारे लोगों ने बसपा सुप्रीमो पर धन उगाही का आरोप लगाते हुए पार्टी को छोड़ा था। इनमें से कई ऐसे चेहरे हैं, जो अपने इलाके में खुद पार्टी की पहचान थे। सपा का दामन थामने वालों में इंद्रजीत सरोज के साथ आसिफ जाफरी, हीरामणी पटेल, मनोज पाण्डेय, हाजी मासूक खान, अजय श्रीवास्तव, विक्रम पटेल, राजू, गीता पासी, दूध नाथ पटेल, घनश्याम केशरवानी सहित कई बड़े नाम शामिल हैं।
इंद्रजीत सरोज का राजनीतिक सफर-
-1996 में पहली बार कौशांबी जिले के मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने।
-1997-98 के दरमियान अनुसूचित जनजाति समिति के सदस्य रहे।
-2001 में इंद्रजीत सरोज विधानमंडल दल का सचेतक बनाया गया।
-2002 में एक बार फिर विधायक बने।
-2003, अगस्त में मायावती सरकार में समाज कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री और बाल विकास पुष्टाहार मंत्री बने।
-यूपी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम वन विकास निगम के अध्यक्ष के तौर पर भी इंद्रजीत सरोज ने कार्यभार निभाया।
-यूपी समाज कल्याण निगम के अध्यक्ष भी बनाए गए।
-2007 में मंझनपुर से तीसरी बार विधानसभा पहुंचे।
-2007 में मायावती सरकार में मंत्री रहे। इस दौरान कृषि विपणन विभाग और अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी निभाई।
-नियम समिति विशेषाधिकार समिति व कार्य मंत्रणा समिति के सदस्य भी रहे।
-2012 में चौथी बार मंझनपुर से विधानसभा चुनाव में जीत कर फिर ये सीट बसपा की झोली में डाली और विधानसभा पहुंचे।
Published on:
21 Sept 2017 04:53 pm
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