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हनुमान जयंती 2022 : अकबर बना रहा था किला तभी खोदाई पर मिली लेटे हनुमानजी की प्रतिमा, जानिए रहस्य

बड़े हनुमान मंदिर पर सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही। सभी बजरंगबली के दर्शन के लिए श्रद्धा भाव से लंबी कतार लगाकर दर्शन कर रहे हैं।जय श्री राम का उद्घोष करते हुए भक्त दर्शन के लिए कतार बद्ध दिखे। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती रही। इसके साथ ही कौशाम्बी, फतेहपुर, मिर्जापुर, जौनपुर सहित जिले के कोने-कोने से बड़ी संख्या में भक्त निशान चढ़ाने के लिए पहुंचे। ट्रैक्टर ट्राली और छोटा हाथी पर निशान के साथ सवार होकर महिलाएं और पुरुष भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए संगम तट पर पहुंचते

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हनुमान जयंती 2022 : अकबर बना रहा था किला तभी खोदाई पर मिली लेटे हनुमानजी की प्रतिमा, जानिए रहस्य

हनुमान जयंती 2022 : अकबर बना रहा था किला तभी खोदाई पर मिली लेटे हनुमानजी की प्रतिमा, जानिए रहस्य

प्रयागराज: संगमनगरी बंधवा स्थित लेटे हनुमान मंदिर देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। हनुमान जयंती के मौके पर संगमत तट स्थित लेटे हनुमन जी का भव्य श्रृंगार किया गया है। दर्शन और पूजा अर्चना के लिए सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी है। जय श्री राम और जय बजरंग बली के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा है। बड़े हनुमान मंदिर पर सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही। सभी बजरंगबली के दर्शन के लिए श्रद्धा भाव से लंबी कतार लगाकर दर्शन कर रहे हैं।

जय श्री राम का उद्घोष करते हुए भक्त दर्शन के लिए कतार बद्ध दिखे। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती रही। इसके साथ ही कौशाम्बी, फतेहपुर, मिर्जापुर, जौनपुर सहित जिले के कोने-कोने से बड़ी संख्या में भक्त निशान चढ़ाने के लिए पहुंचे। ट्रैक्टर ट्राली और छोटा हाथी पर निशान के साथ सवार होकर महिलाएं और पुरुष भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए संगम तट पर पहुंचते रहे।

अकबर बना रहा किला तभी खोदाई पर मिली थी प्रतिमा

कहा जाता है कि यमुना तट पर मुगल राजा अकबर अपना किला बनवा रहा था। जहां हनुमान जी लेटे हुए हैं, उधर किला की दीवार खड़ी होनी थी। खोदाई में हनुमान जी की विशाल प्रतिमा निकली, मजदूर उसे उठाने का प्रयास करने लगे। वो जितना प्रतिमा को उठाते, विशाल प्रतिमा उतना धंसती चली जा रही थी। इसकी जानकारी अकबर को हुई तो उसे हनुमान जी की शक्ति का एहसास हुआ। वो जान गया कि प्रतिमा को किसी कीमत पर हटाया नहीं जा सकता। अगर प्रतिमा को क्षति पहुंचाई गई तो उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद से ही वह प्रतिमा को यथा स्थिति में रहने का निर्णय लिया।

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राजा अकबर ने छोड़ दी प्रतिमा वाली जगह

लेटे हनुमानजी प्रतिमा का विशाल रूप देखकर वह काफी चिंतन किया और इसके बाद राजा अकबर ने प्रतिमा वाले स्थान को छोडऩे का निर्देश दिया। इसके बाद हनुमान जी की पूजा की जिम्मेदारी श्रीनिरंजनी अखाड़ा के श्रीमहंत बाबा बालकेसर को मिली। बाबा बालकेसर को प्रयागराज के विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों एकड़ जमीन भी दिया। उस जमीन को संरक्षित करने के लिए बाबा बालकेसर ने श्री मठ बाघम्बरी गद्दी की स्थापना किया। तभी से बाघम्बरी का महंत ही लेटे हनुमान मंदिर की देखरेख करता आ रहा है। मौजूदा समय में लेटे हनुमान जी का मंदिर श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के अंतर्गत संचालित होता है। अभी श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के पीठाधीश्वर श्रीमहंत बलवीर गिरि हैं।