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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयकर नोटिस की वैधता की चुनौती याचिका जाने क्यों किया खारिज

कोर्ट ने कहा है कि कोविड के कारण विभाग ने अधिसूचना जारी कर मियाद एक साल के लिए बढ़ा दी थी। जिससे याची कंपनी के वर्ष 2015-16 के मूल्यांकन की 30 मार्च 21 को जारी नोटिस समय के भीतर थी। क्योंकि मियाद 31मार्च 21तक बढ़ गई थी। जिसे छः साल के भीतर जारी करने के लिए प्रमुख आयुक्त आयकर विभाग की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं थी। कोर्ट ने चार साल की मियाद बीत जाने के बाद जारी आयकर नोटिस की वैधता व अधिकारिता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयकर नोटिस की वैधता की चुनौती याचिका जाने क्यों किया खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयकर नोटिस की वैधता की चुनौती याचिका जाने क्यों किया खारिज

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुद्धा सोर्टेक्स राइस इंडस्ट्रीज प्रालि कंपनी के खिलाफ चार साल की मियाद बीत जाने के बाद आयकर कानून की धारा 148 के तहत जारी नोटिस को वैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कोविड के कारण विभाग ने अधिसूचना जारी कर मियाद एक साल के लिए बढ़ा दी थी। जिससे याची कंपनी के वर्ष 2015-16 के मूल्यांकन की 30 मार्च 21 को जारी नोटिस समय के भीतर थी। क्योंकि मियाद 31मार्च 21तक बढ़ गई थी। जिसे छः साल के भीतर जारी करने के लिए प्रमुख आयुक्त आयकर विभाग की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं थी। कोर्ट ने चार साल की मियाद बीत जाने के बाद जारी आयकर नोटिस की वैधता व अधिकारिता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने दिया है।

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याचिका पर अधिवक्ता पर्व अग्रवाल तथा आयकर विभाग के अधिवक्ता गौरव‌ महाजन ने बहस की। याची का कहना था कि आयकर कानून के तहत मूल्यांकन वर्ष के चार साल के भीतर कर अपवंचन की नोटिस जारी की जा सकती है। इसके बाद छः वर्ष तक प्रमुख आयुक्त की पूर्व अनुमति से ही नोटिस जारी की जा सकती है। नोटिस चार साल बाद बिना प्रमुख आयुक्त का पूर्व अनुमोदन लिए जारी की गई है। इसलिए अवैध है। आयकर विभाग का कहना था कि चार साल की मियाद एक साल कोरोना के कारण बढ़ा दी गई थी। नोटिस समय के भीतर जारी की गई है। जिससे सहमत होते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।