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इलाहाबाद हाईकोर्ट: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ याचिका की सुनवाई टली, विवादित भाषण का है मामला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने मऊ जिले के नवल किशोर शर्मा की याचिका पर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने मऊ जिले के नवल किशोर शर्मा की याचिका पर दिया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ याचिका की सुनवाई टली, विवादित भाषण का है मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ याचिका की सुनवाई टली, विवादित भाषण का है मामला

प्रयागराज: विवादित भाषण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दाखिल याचिका की सुनवाई टाल दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने मऊ जिले के नवल किशोर शर्मा की याचिका पर दिया है।

मामले में याची अधिवक्ता का वकालतनामा पत्रावली पर मौजूद न होने पर दाखिल करने का कोर्ट ने समय दिया और अगली सुनवाई की तिथि 27 सितंबर नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने मऊ जिले के नवल किशोर शर्मा की याचिका पर दिया है।

भाषण से धार्मिक भावनाओं को पहुंचा ठेस

मामले में याचिका व्यक्तिगत रूप में दाखिल की थी। बाद में वकील रखा है। इस याचिका कहा गया है कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर में दिए गए भाषण से धार्मिक आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान था। मामले में करार देते हुए शिकायत दर्ज कराने की मांग की गई है। याचिका पर राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम एके सण्ड ने पक्ष रखा। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए 27 सितंबर को तिथि निर्धारित की है।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के 7 आरोपियों को किया बरी, जनिए वजह मामले में कोर्ट ने धरम देव यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014) 5 एससीसी 509, धन राज व ढांड बनाम हरियाणा राज्य (2014) 6 एससीसी 745, और चंद्रपाल बनाम। छत्तीसगढ़ राज्य 2022 लाइव लॉ (एससी) 529 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा जताया। जब आरोपी और मृतक को आखिरी बार जीवित देखा गया था और जब मृतक मृत पाया गया था, इस बीच ज्यादा समय अंतराल है।