
सत्र 2026-27 के लिए नया नियम लागू, सभी स्कूलों को मानना होगा आदेश (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
UP Board Mandates Authorized Books Only: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए यूपी बोर्ड ने सत्र 2026-27 के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब प्रदेश के सभी स्कूलों में केवल अधिकृत (ऑथराइज्ड) किताबों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। अनधिकृत पुस्तकों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह निर्देश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम के तहत जारी किया गया है, जिससे इसे कानूनी मजबूती भी मिल गई है। सरकार का उद्देश्य छात्रों को एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, ताकि अलग-अलग किताबों के कारण उत्पन्न असमानता को खत्म किया जा सके।
नए आदेश के अनुसार कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों की अधिकृत किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। इन विषयों की पढ़ाई केवल निर्धारित पुस्तकों से ही कराई जाएगी, जिससे छात्रों की बुनियादी समझ मजबूत हो सके।
कक्षा 11 और 12 के लिए कुल 36 विषयों की अधिकृत किताबें तय की गई हैं। इन विषयों में विज्ञान, वाणिज्य और कला वर्ग के सभी प्रमुख विषय शामिल हैं। इस कदम से उच्च कक्षाओं में भी पढ़ाई का स्तर एक समान बनाए रखने की कोशिश की गई है।
एनसीईआरटी की करीब 70 किताबों को पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। इन किताबों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और इन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलेगी।
हिंदी, संस्कृत और उर्दू जैसे भाषाई विषयों के लिए भी 12 चयनित पुस्तकों को अधिकृत सूची में शामिल किया गया है। इससे क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा, साथ ही छात्रों को बेहतर अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी स्कूलों में पुस्तक जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को अधिकृत पुस्तकों के महत्व और उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी लोग नए नियमों से अवगत रहें।
छात्रों को अधिकृत किताबें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी छात्र संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
यह आदेश केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी सभी स्कूलों पर लागू होगा। इससे पूरे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाई जा सकेगी। मुद्रण और वितरण के लिए तीन एजेंसियां अधिकृत पुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए तीन एजेंसियों को अधिकृत किया गया है। इन एजेंसियों के माध्यम से ही किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे नकली या अनधिकृत किताबों की बिक्री पर रोक लग सके।
इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार ने साफ किया है कि यदि कोई स्कूल या संस्था अनधिकृत किताबों का उपयोग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
सूत्रों का मानना है कि यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्रों को समान स्तर की शिक्षा मिलेगी और भ्रम की स्थिति खत्म होगी।
यूपी बोर्ड का यह निर्णय प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। अधिकृत किताबों के उपयोग से न केवल पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा, बल्कि छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भी लाभ मिलेगा।
Published on:
05 Apr 2026 11:30 pm
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