15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हिंदुस्तान की शान है हिंदी…अंग्रेजी में नहीं होगा काम, GM ने बिना साइन किए लौटाई फाइल

प्रयागराज डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के महाप्रबंधक देवेन्द्र सिंह ने आखिर अपने ऑफिस से बिना शाइन किए क्यों लौटाई फाइल क्या वजह पड़ गईं, प्रयागराज के पुरोधाओ के बारे में जानिए वो कौन थे जिनकी वजह से हिन्दी का पूरे देश भर में डंका बजता था..

2 min read
Google source verification
gm_devendra_simgh.jpg

प्रयागराज: आज 14 सितंबर है हिंदी दिवस मनाने का दिन। क्योंकि 14 सितंबर 1949 को ही हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ था। प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) कभी हिंदी के पुरोधाओं का गढ़ था। पं. बालकृष्ण भट्ट, महामना पं. मदन मोहन मालवीय, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', महीयशी महादेवी वर्मा, पं. देवी दत्त शुक्ल और हिंदी के ऐसे ही मनीषियों की लंबी फेहरिश्त। इन सभी की बदौलत प्रयागराज से हिंदी का देश भर में डंका बजता था। इन लेखकों और रचनाकारों के दौर में हिंदी की जो प्रतिष्ठा थी, वह अब नहीं रही। अब तो ऐसे लोग भी गिने चुने ही हैं जो हिंदी को सिर माथे पर बिठाए हैं और अंग्रेजी के वर्चस्व के बीच हिंदी का परचम लहराने की कवायद में जुटे हैं। वहीं हिंदी के प्रति लगातार होते घात से लोगों में निराशा है। हिंदी के सुनहरे काल से लेकर अब तक के सफर को बयां कर रही है।

हिंदी का नाम "हिंदी" कैसे पड़ा?

आप सभी हिंदी दिवस के इतिहास के बारे में तो जान चुके हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं आखिर हिंदी भाषा का नाम हिंदी कैसे पड़ा। अगर नहीं, तो चलिए आपको इसके बारे में भी बताते हैं। शायद भी आप जानते होंगे कि असल में हिंदी नाम खुद किसी दूसरी भाषा से लिया गया है। फारसी शब्द ‘हिंद’ से लिए गए हिंदी नाम का मतलबसिंधु नदी की भूमि होता है। 11वीं शताब्दी की शुरुआत में फारसी बोलने वाले लोगों ने सिंधु नदी के किनारे बोली जाने वाली भाषा को ‘हिंदी’ का नाम दिया था।

विश्व में हिन्दी के योगदान के बारे में जानिए

हिंदी इस समय विश्व में तेजी से उभरती हुई भाषा है। दुनियाभर में 60 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी भाषा बोलते हैं। यही वजह है कि अंग्रेजी और मंदारिन चीनी भाषा के बाद हिंदी दुनियाभर में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। भारत के अलावा विदेशों में भी हिंदी बोली जाती है। इन देशों में मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद, टोबैगो और नेपाल आदि शामिल हैं

बिना शाइन किए लौटाई फाइल जानिए

आज हिंदी दिवस के अवसर पर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के प्रयागराज स्थित कार्यालय में महाप्रबंधक समन्वय देवेंद्र सिंह ने अपने कार्यालय पर बैठकर हिंदी में कार्य करते दिखे तो तभी महाप्रबंधक देवेंद्र सिंह के ऑफिस में एक फाइल पहुंची जिसको उन्होंने बिना साइन किए लौटा दिया फिर उन्होंने कर्मचारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि यह फाइल ले जाओ और जिस विभाग की हो वहां पहुंचा दो और कहो कि आज हिंदी दिवस है आज से हम ज्यादातर कार्य हिंदी में ही करेंगे हिंदी हमारी मातृभाषा है।