
प्रयागराज में फिर से दिखा लाशों का अंबार, कोरोना काल से भयावक दृश्य, दूर-दूर तक दफ़नाए गए शव
प्रयागराज: यूपी के प्रयागराज जिला में एक फिर दिल दहलाने वाली भयावह तस्वीर देखने को मिली है। फाफामऊ घाट पर दूर-दूर तक लाशों का अंबार दिखाई दे रहा है। गंगा के किनारे लाशों का ढेर देखकर हर कोई हैरान है। प्रशासन द्वारा लगातार दिए गए निर्देशों का पालन नहीं होने के साथ ही एनजीटी के निर्देशों का भी उल्लंघन किया जा रहा है। फाफामऊ गंगा के किनारे रेत में यह लाशें दफनाई जा रहीं है।
कोरोनाकाल की याद दिला रहीं है यह तस्वीरें
संगमनगरी प्रयागराज में एक बार फिर गंगा नदी के किनारे दफनाई गई लाशों का अंबार कोरोनाकाल की याद दिला रहीं है। दूर-दूर तक दफनाई गई यह लाशें हर किसी को रोकने को मजबूर कर दी है। जानकारी के अनुसार गंगा किनारे डेडबॉडी दफनाने की महज परंपरा है, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोकने के बावजूद यह परंपरा जारी है। फाफामऊ घाट और श्रृंगवेरपुर घाट में आज भी लाशों को दफ़नाया जा रहा है। गर्मी की वजह से गंगा का पानी कम से होने से रेत पर अब कब्र ही कब्र नजर आने लगी है।
2021 में नजर आया था लाशों का अंबार
2021 में जब कोरोनाकाल चल रहा था, तब इस तरह की तस्वीर देखने को मिली थी। उस समय गरीब समुदाय के लोग लकड़ी नहीं खरीद पा रहें थे जिसकी वजह से वह गंगा किनारे रेत पर शव को दफना कर चले जाते थे। कोरोनाकाल में मरने वालों की संख्या अधिक थी लेकिन सामान्य दिनों में इस तरह की तस्वीर दिखना चिंता का विषय है। इसके साथ मानसून आने के साथ गंगा का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ता है। जिसकी वजह से दफनाई गई लाशें नदी में बह जाती है। इस वहज से गंगा नदी भी प्रदूषित हो जाती है। कोरोनाकाल के बाद से प्रशासन की टीम में ने ध्यान नहीं दिया जिसकी वजह से यह हालत दूसरी बार बने हैं।
शवों को दफनाने की है परंपरा
फाफामऊ घाट पर अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों का कहना है कि गंगा घाट के किनारे शव दफनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रहीं है। जिसकी वजह आज ग्रामीण अंचल के लोग इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इसके साथ ही फाफामऊ घाट पर लकड़ी और शव दहन की व्यवस्था न होने की वजह से भी लोग गंगा की रेती पर लाशों को दफना रहे हैं। जिला प्रशासन और नगर निगम को ध्यान देना चाहिए।
Updated on:
18 May 2022 02:26 pm
Published on:
18 May 2022 01:49 pm
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