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जेल से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में यूपी का यह बाहुबली नेता, पहली बार एके.47 चलवाने का लगा था आरोप…

तत्कालीन सपा विधायक के हत्याकांड का लगा था आरोप सालो से है सलाखों के पीछे

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 election in 2019

Karwaria Bandhu

इलाहाबाद :यूपी की सियासत में अपराध और बाहुबल माने बड़ा राजनीतिक रसूख। कभी सियासत के गलियारों में बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों की चहलकदमी हुआ करती थी। जिसे दरकिनार कर बाहुबल के जरिये सत्ता पाने और सियासत में बने रहने का आसान तरीका हो गया। 80 के दशक में पूर्वांचल की धरती पर अपराध और बाहुबल ने राजनीत में पांव पसारना शुरू किया। जो बीते दो दशक में इस कदर अपनी जगह बना चुका है।जिसे खत्म कर पाना संभव नही है।जो राजनीत कभी जन सेवा के लिए की जाती थी।अब उसका इस्तेमाल बाहुबली नेता अपने बचाव के लिए करते हैं।

जब कोठी पर लगा सपा बसपा भाजपा तीनो का झंडा लगा
हम आपको ऐसे ही एक बाहुबली सियासी परिवार के बारे में बताते हैं जिसने राजनीति में इस कदर अपना रसूख कायम किया की सियासत की हर सीढ़ी उसके पांव के नीचे आ गई।और इस बाहुबली नेता पर पहली बार इलाहाबाद में अत्याधुनिक हथियार चलवाने और हत्या कराने का आरोप लगा।हम बात कर रहे हैं, सुबे के करवरिया परिवार की। बाहुबली करवरिया परिवार जो हर दल में अपनी मजबूत पकड़ रखता है।जो भी पार्टी सत्ता में आयी।यह परिवार उसका हिस्सा बना रहा।बता दें की एक समय ऐसा भी रहा जब इनकी कोठी पर सपा ,बसपा और भाजपा तीनो का झंडा लगा। तीनों दलों के पार्टी कार्यालय कोठी में बनाए गए।

1996 पहली बार जिले में चली चली थी एके.47
करवरिया परिवार कई दशकों से अपनी दबंगई के लिए प्रदेश में जाना जाता है। लेकिन यह परिवार उस समय प्रदेश में चर्चा में आया जब 13 अगस्त 1996 को समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक पंडित जवाहर यादव हत्याकांड का आरोप करवरिया बंधु पर लगा।पंडित जवाहर यादव मुलायम सिंह के बेहद करीबी माने जाने वाले विधायक थे। जानकारों की माने तो 1996 में पहली बार जिले में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ था।कहां जाता है कि हत्या के लिए दूसरे राज्य से शूटर बुलाए गए थे।हत्याकाण्ड बालू खनन शराब कारोबार और सियासी वर्चस्व के लिए हुआ था।इस मामले में दिग्गज करवरिया परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।जिसमें तेरह साल बाद करवरिया बंधुओं को जेल जाना।

यूपी की जरायम में 1992 में आया अत्याधुनिक हथियार
सियासत और अपराध के गठजोड़ पर बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष नारायण ने बताया कि यूपी की जरायम में पहली बार 1992 में एके.47 का इस्तेमाल हुआ था। जो अब तक सैकड़ों बार सामने आ चुका है। 92 में पूर्वांचल में हुई कुछ घटनाओं के बाद 1996 में इलाहाबाद की सड़कों पर अत्याधुनिक हथियारों ने गोलियां बरसाई थी। जिसमें पंडित जवाहर यादव की हत्या हुई थी। यह हत्या कई सालों तक लोगों की जुबां पर रही ।जिसे आज भी लोग याद करके शहम जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल चौराहे के पास घेर कर उनकी गाड़ी को गोलियों से भून दिया गया था।

लोक सभा हारने के बाद बढ़ी मुश्किल
1996 में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में स्थानीय प्रशासन के जांच के अलावा दो बार सीबीसीआईडी जांच कराई गई। जिसमें यह करवरिया बच गये। लेकिन 2012 में जब अखिलेश यादव सत्ता में आए। तब पंडित जवाहर यादव की पत्नी और तत्कालीन विधायक विजमा यादव ने अखिलेश सरकार पर भारी दबाव बनाया। जिसके बाद 2 जनवरी 2014 को उदयभान करवरिया ने सरेंडर करना पड़ा। बता दें कि सरेंडर के एक हफ्ते पहले पुलिस ने करवरिया पर ₹5000 का इनाम घोषित किया था। वहीं फूलपुर के तत्कालीन सांसद कपिल मुनि करवरिया 2014 के लोकसभा में चुनाव बहुजन समाज पार्टी से लोकसभा के मैदान थे। जिसमे हारने के बाद मुश्किलें और बढ़ी। कपिल और सूरज भान करवरिया को भी समर्पण करना पड़ा।

चुनावी मैदान में ताल ठोकने के लिए बढ़ रही बेताबी
बीते दिनों प्रदेश सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के उन सभी नेताओं के मामले में अलग.अलग जिलों से आख्या तलब की थी।जिन जिलों में भाजपा नेताओं के ऊपर आपराधिक मामले दर्ज है जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उदयभान करवरिया तक का नाम शामिल है।लेकिन आदेश के बाद अभी तक क्या हुआ यह कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए सलाखों के पीछे से सियासी जोड़ तोड़ चलने की शुगबुगाहट है। जिसमें इस बात की चर्चा सुर्खियों में है, कि उदयभान करवरिया आगामी लोकसभा चुनाव में दो.दो हाथ करने की तैयारी कर रहे हैं।