
प्रयागराज में 6 जनवरी से शुरू हुए माघ मेले में आवारा कुत्तों का आतंक देखने को मिल रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को आवारा कुत्ते लगातार काट रहे हैं। मेले में आए लोगों ने कुत्तों की शिकायत माघ मेला प्रशासन से भी की है।
सभी श्रद्धालुओं को रेबीज का लग चुका है टीका
माघ मेले की शुरुआत के बाद से आसपास के अस्पतालों में रोजाना औसतन 17 लोग कुत्ते के काटे जाने के बाद पहुंच रहे हैं। त्रेवेणी अस्पताल में अब तक 66 लोगों को रेबीज का टीका लगाया जा चुका है। गंगा अस्पताल में 52 श्रद्धालुओं को एंटी रेबीज का टीका लगाया गया है।
बेली अस्पताल में 150 और कॉल्विन अस्पताल में 120 कुत्ते काटने के मामले सामने आए हैं। आसपास के अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन शॉट्स लगवाने के लिए लोग आ रहे है। जब से मेले की शुरूआत हुई है। तभी से कुत्ते लोगों को काट रहे हैं।
खाने की तलाश में टेंटे में घुसे कुत्ते
श्रद्धालुओं ने बताया, “कुत्ते दारागंज, झूंसी, नागवासुकी मंदिर और छतनाग के आसपास के इलाकों से माघ मेले में श्रद्धालुओं के लिए बने टेंट में घुस आए हैं। सभी कुत्ते भंडारों से बचे हुए खाने की तलाश में टेंट में आ जाते हैं। हमारे कपड़े, सामान सब खराब कर देते हैं। भगाने पर हमला कर देते हैं। जिस वजह से यहां रहने में कई दिक्कते हो रही हैं।"
मेले में तीर्थयात्रियों और संतों के लिए भी बने भोजन को यह कुत्ते खा जाते हैं। आगर एक कुत्ता हो तो लोग डंडे मारकर भगा देते हैं। आवारा कुत्ते एक बड़े झूंड के साथ मेले में घुस आए हैं। जो किसी भी समय मेले में आए तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं पर हमला कर देते हैं। कुत्ते तब हमलावर ज्यादा होते हैं जब यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा होती है।
सभी श्रद्धालुओं को रेबीज का लग चुका है टीका
माघ मेले की शुरुआत के बाद से आसपास के अस्पतालों में रोजाना औसतन 17 लोग कुत्ते के काटे जाने के बाद पहुंच रहे हैं। त्रेवेणी अस्पताल में अब तक 66 लोगों को रेबीज का टीका लगाया जा चुका है। गंगा अस्पताल में 52 श्रद्धालुओं को एंटी रेबीज का टीका लगाया गया है।
बेली अस्पताल में 150 और कॉल्विन अस्पताल में 120 कुत्ते काटने के मामले सामने आए हैं। आसपास के अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन शॉट्स लगवाने के लिए लोग आ रहे है। जब से मेले की शुरूआत हुई है। तभी से कुत्ते लोगों को काट रहे हैं।
खाने की तलाश में टेंटे में घुसे कुत्ते
श्रद्धालुओं ने बताया, “कुत्ते दारागंज, झूंसी, नागवासुकी मंदिर और छतनाग के आसपास के इलाकों से माघ मेले में श्रद्धालुओं के लिए बने टेंट में घुस आए हैं। सभी कुत्ते भंडारों से बचे हुए खाने की तलाश में टेंट में आ जाते हैं। हमारे कपड़े, सामान सब खराब कर देते हैं। भगाने पर हमला कर देते हैं। जिस वजह से यहां रहने में कई दिक्कते हो रही हैं।"
मेले में तीर्थयात्रियों और संतों के लिए भी बने भोजन को यह कुत्ते खा जाते हैं। आगर एक कुत्ता हो तो लोग डंडे मारकर भगा देते हैं। आवारा कुत्ते एक बड़े झूंड के साथ मेले में घुस आए हैं। जो किसी भी समय मेले में आए तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं पर हमला कर देते हैं। कुत्ते तब हमलावर ज्यादा होते हैं जब यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा होती है।
कुत्तों कोे पकड़ने की कोशिशे की जा रही है- नगर निगम
माघ मेले के सेनेट्ररी इंजार्च डॉ. आनंद सिंह ने बताया, “माघ मेले में आसपास के इलाकों से आए आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। मेला में घूमने वाले आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए निगम प्राथमिकता के आधार पर कोशिशे की जा रही है।”
माघ मेले के सेनेट्ररी इंजार्च डॉ. आनंद सिंह ने बताया, “माघ मेले में आसपास के इलाकों से आए आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। मेला में घूमने वाले आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए निगम प्राथमिकता के आधार पर कोशिशे की जा रही है।”
Updated on:
02 Feb 2023 02:03 pm
Published on:
02 Feb 2023 11:39 am
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