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कांग्रेस की कर्म भूमि में भाजपा की कार्यकारिणी के मायने

कांग्रेस के लिए क्या है इलाहाबाद का महत्वभाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बहाने कांग्रेस का पर नजर

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Varanasi Uttar Pradesh

Jun 13, 2016

BJP NWC

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प्रसून पांडेय
इलाहाबाद. उत्तर प्रदेश में 14 साल से वनवास झेल रही भाजपा ने सत्ता पाने के लिए कांग्रेस की तपोभूमि से अपने मिशन का आगाज कर दिया। संगम नगरी में भाजपाइयों के मंथन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह संदेश भी छिपा है जिसमें उन्होंने कांग्रेस मुक्त भारत बनाने का नारा दिया था।

लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था। इसके बाद एक-एक कर कई राज्यों की सत्ता कांग्रेस के हाथों से खिसक गई। हाल ही में असम में मिली ऐतिहासिक जीत से उत्साहित भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय कार्यसमिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा भाजपा के सभी दिग्गज और नौ राज्यों के मुख्यमंत्री शिरकत कर रहे हैं। कभी कांग्रेस का मुख्यालय रहे इलाहाबाद में भाजपा कार्यसमिति के बहाने शक्ति प्रदर्शन कर 2019 के मिशन को पूरा करना चाहती है।

यूं ही नहीं चुना इलाहाबाद को
नेहरू और इंदिरा गांधी की विरासत को समेटे इस शहर से कांग्रेसियों का हमेशा से लगाव रहा है। भाजपा की इस बैठक का फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब कांग्रेस खुद जिले में नेहरू-इंदिरा की विरासत पर यहां बड़ा कार्यक्रम करने की तैयारी में है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि इलाहाबाद को उसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की वजह से चुना गया है। फिर भी भाजपा के इस मंथन के पीछे कई सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

लम्बे समय तक कांग्रेस का रहा मुख्यालय
कांग्रेस के इतिहास में इलाहाबाद का काफी योगदान रहा है। आजादी से पहले यह शहर कांग्रेस का मुख्यालय बना जो 1948 तक रहा। कांग्रेस के तीन अधिवेशन 1888, 1892 और 1910 में यहां हुए। तब इनकी अध्यक्षता क्रमश: जार्ज यूल, व्योमेश चन्द्र बनर्जी और सर विलियम बेडरबर्न ने की थी। महारानी विक्टोरिया का 1 नवम्बर, 1858 का प्रसिद्ध घोषणा पत्र यहीं मिंटो पार्क में वायसराय लॉर्ड केनिंग ने पढ़ा था।

नेहरू-इन्दिरा की जन्मभूमि रहा
इलाहाबाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू और इन्दिरा गांधी की जन्मभूमि रहा। नेहरू परिवार का पैतृक आवास स्वराज भवन और आनन्द भवन यहीं है। महात्मा गांधी ने कई आंदोलन की भूमिका यहां तैयार की। आजादी से पहले आनंद भवन कांग्रेस मुख्यालय रहा और उससे पहले राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र होता था। नेहरू ने 1928 में पहली बार यहीं 'पूर्ण स्वतंत्रता' की घोषणा वाला भाषण लिखा। 'भारत छोड़ो' आंदोलन की रूपरेखा भी यहीं पर बनी थी।

आनन्द भवन का इतिहास
जहां आनन्द भवन बना है, उस 19 बीघा भूमि को 1857 के प्रथम विद्रोह में वफादारी के लिए स्थानीय ब्रिटिश प्रशासन ने शेख फैय्याज अली को पट्टे पर दिया था। 1888 में यह जमीन और बंगला जस्टिस सैय्यद महमूद ने खरीदा और 1894 में यह जायदाद राजा जयकिशन दास ने खरीद ली।
7 अगस्त 1899 को मोतीलाल नेहरू ने इस जमीन व बंगले को 20 हजार रुपए में राजा जयकिशन दास से खरीद लिया। 1948 में कांग्रेस मुख्यालय इलाहाबाद से दिल्ली चला गया। इसके बाद पं. नेहरू ने स्वराज भवन में अनाथ बच्चों का बाल भवन बना दिया और अन्य सांस्कृतिक कार्यों के लिए न्यास बना दिया। इंदिरा गांधी का जन्म भी आनंद भवन में हुआ था।

इलाहाबाद से सात प्रधानमंत्री
पं. जवाहर लाल नेहरू
नेहरू ने इलाहाबाद के फूलपुर संसदीय क्षेत्र को चुनाव क्षेत्र बनाया और जीतकर प्रधानमंत्री बने। नेहरू के बाद फूलपुर सीट से उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित चुनाव जीतीं। अभी इस सीट से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य सांसद हैं।

गुलजारी लाल नंदा
देश के दूसरे प्रधानमंत्री गुलजारी नंदा की शिक्षा इलाहाबाद में हुई थी। इन्होंने शहर में रहते हुए राजनीति जीवन की शुरूआत की। असहयोग आंदोलन के समय भी नंदा ने अपना समय इलाहाबाद में गुजारा था।

लाल बहादुर शास्त्री
9 जून 1964 को तीसरे प्रधान मंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री का जन्म तो मुगलसराय में हुआ था। लेकिन संगम नगरी इनका कार्य क्षेत्र रहा। 1965 में भारत-पाक युद्ध के समय शास्त्रीजी ने यहीं उरुवा ब्लॉक में जय जवान, जय किसान नारा दिया था।

इंदिरा गांधी
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, 1917 में यहीं स्वराज भवन में हुआ। इलाहाबाद उनका कार्यक्षेत्र तो नहीं रहा लेकिन जन्मभूमि से उनका लगाव किसी से छिपा नहीं है।

राजीव गांधी
देश के नौवें प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुम्बई में हुआ। लेकिन उनका अपने पैतृक शहर इलाहाबाद से बेहद लगाव रहा। उनके पिता फिरोज गांधी की अंत्येष्ठि इलाहाबाद में हुई थी।


विश्वनाथ प्रताप सिंह
दसवें प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह इलाहाबाद के थे। उनका जन्म वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी रहे।

चन्द्रशेखर
11वें प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर का जन्म तो बलिया में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपना अधिकतर समय इलाहाबाद में बिताया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। इस दौरान वह हिन्दू हॉस्टल के कमरा नम्बर 11 में रहते थे।

फिरोज गांधी की मजार भी यहीं
इन्दिरा गांधी के पति फिरोज गांधी की मजार भी इलाहाबाद में है। निधन के बाद फिरोज को सुपुर्द-ए-खाक दिल्ली में किया गया लेकिन बाद में इलाहाबाद में उनकी मजार बनवाई गई। कुछ साल पहले राहुल गांधी इलाहाबाद प्रवास के दौरान मजार पर गए भी थे।

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