13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चाचा की सियासी महत्वाकांक्षा भतीजे के विकास कार्यों पर पड़ी भारी 

जिले के कई अधिकारियों के संबंध सीधे मुलायम सिंह अखिलेश यादव और शिवपाल यादव से जुड़े हैं

2 min read
Google source verification

image

Sarweshwari Mishra

Oct 25, 2016

Shivpal-Akhilesh

Shivpal-Akhilesh

इलाहाबाद. सूबे की सबसे बड़ी सियासी पार्टी और परिवार समाजवादी विचारधारा का नकली लिबास ओढ़े लोहिया के नाम का ढोंग रचने में माहिर परिवारवादी पार्टी और परिवार के नेता जनता के सामने सत्ता के संघर्ष के लिये खुले मंच पर आमने सामने आ गये और यह सब यूपी की राजनीति में लम्बे समय तक अपना जलवा कायम रखने वाले मुलायम सिंह यादव के सामने हुआ । हमेशा की तरह समाजवादी पार्टी समर्थकों को यह विश्वास था की पार्टी सुप्रीमों आज फिर मंच पर पूरे परिवार को एक कर देंगे । सब कुछ सामान्य हो जायेगा । इस संग्राम के चलते हफ्ते भर से सभी विधायकों को लखनऊ बुलाया गया है।



इलाहाबाद छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्रा का शहर आज टकटकी लगाये बैठा रहा । पूरे महासंग्राम में इलाहाबाद से वरिष्ठ नेता रेवती रमण पिता पुत्र और सरकार संगठन के बीच सेतु की भूमिका में है । पार्टी कार्यालय से लेकर विधायको और नेताओं के घर के बाहर सन्नटा पसरा है । सभी पदाधिकारी राजधानी में तलब है और कार्यकर्ता बेचैन । सही तो यह है की उम्मीदों के साइकिल पर सवार कार्यकर्ता ही परेशान है कोई कुछ बोल तो नही रहा। लेकिन सियासी दंगल में खुद को पिसता हुआ पा रह है । युवा अखिलेश के साथ है तो संगठन नेता जी के साथ है । पत्रिका ने सपा के विधायक से बात की लेकिन विधायक कुछ बोलने को तैयार नही हो रहे थे वो संतुष्ट हुए और नाम ना लिखने शर्त बोले कुर्सी के लिये चाचा मुख्यमंत्री को कमजोर कर रहे है । लेकिन लड़ाई 99 बनाम एक परसेंट की है । विधायक अखिलेश के साथ है सरकार को कोई खतरा नही लेकिन शिवपाल जी ने व्यकितगत हित के लिये बड़ा नुकसान करा दिया । नेता जी की उम्र और तबियत का गलत इस्तेमाल हो रह है ।



सरकार और परिवार के बीच चल रहे गृह युद्ध में ट्विस्ट तब आया जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चीफ सेक्रेट्री अनीता सिंह को आदेश दिया की जब तक मै न कहू किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नही होगा । और डीजीपी को भी आदेश मिला की मेरे कहे बिना कोई भी आदेश ना माना जाये । जैसे ही इस फरमान की सूचना यूपी के पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद पहुंची तो अफसर भी सकते आ गये सरकार पर संकट की आशंका को देखते हुए अफसर भी चौक्कने रहे । पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगाहें राजधानी पर टिकी हैं। टीवी पर नजरें जमाएं अफसर लखनऊ के अधिकारियों और अपने करीबी नेताओं के संपर्क में लगे है और हर पल बढ़ रही रार पर नजर बनाए हुए हैं।



कब क्या होगा प्रदेश कब अधिकारियो की गिरफ्त में होगा और राजनीति के चगुल से बाहर आकर अपनी भडास निकलने का मौका मिलेगा । पुलिस प्रशासन समेत सभी अम्लो के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सपा में मचे घमासान पर ही चर्चा चलती रही। कोई मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पक्ष में दलील दे रहा तो कोई मुलायम सिंह यादव के पक्ष में खड़ा दिखा। जिले के कई अधिकारियों के संबंध सीधे मुलायम सिंह अखिलेश यादव और शिवपाल यादव से जुड़े हैं। कई आजम खां के करीबी हैं तो कई दूसरे मंत्रियों के खास हैं। ऐसे में अफसरों के बीच सपा की रार खास चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं लेकिन आपसी बातचीत में हर कोई लखनऊ की चर्चा ही कर रहा है।

ये भी पढ़ें

image