25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी का बड़ा बयान ,राजनीतिक गलियारों में हलचल

-भाजपा प्रदेश अध्यक्ष -विधानसभा अध्यक्ष - पांच बार रहे विधायक -बंगाल के पूर्व राज्यपाल

2 min read
Google source verification
uttar pradesh

keshri nath tripathi

प्रयागराज। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी अपने पांच साल के कार्यकाल के बाद अपने गृह नगर प्रयागराज वापस लौटे है। सियासी गलियारों में पंडित जी के नाम से मसहूर केशरी नाथ प्रयाग पहुंचते ही एक बार फिर पहले की तरह राजनीतिक तौर पर सक्रिय हो गये गये है। पंडित जी वापसी के ने फिर से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेते हुए भाजपा के अलग-अलग कार्यक्रम में शिरकत करना शुरू किया है।

राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए केसरीनाथ त्रिपाठी को लेकर सियासी गलियारे में चर्चा है। कहा जा है की पंडित जी राजनीतिक तौर पर बड़ा निर्णय ले सकते है। पंडित जी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा की उनके लिए उनके लिए राजनीति और वकालत दोनों के ही दरवाजे खुले हैं। वह पूरी तरह से फिट और सक्रिय है ।उन्होंने कहा की वह लोगों के बीच रहेंगे। केशरी नाथ त्रिपाठी इलाहाबाद हाईकोर्ट के नामी वकीलों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल रहते हुए वह किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ले सकते थे। लेकिन लौटने के बाद उन्होंने एक बार फिर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।

इसे भी पढ़े -कांग्रेस नेताओं का ऑडियो वायरल ,सियासी गलियारों में चर्चा

गौरतलब है की केशरी नाथ त्रिपाठी का लंबा राजनीतिक कैरियर रहा है।उत्तर प्रदेश की राजनीति में त्रिपाठी का झंडा चार दशकों तक बुलंद रहा। 1934 में जन्मे त्रिपाठी 1946 स्वयंसेवक संघ स्वयंसेवक बनें ।1952 में भारतीय जनसंघ में कार्यकर्ता की तरह जुड़े और काम शुरू किया। कश्मीर आंदोलन में भाग लेते हुए जेल की सजा काटी। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने के चलते 1990 में 23 अक्टूबर से 10 नवंबर तक जेल में बंद रहे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1953 में स्नातक और 1955 में एलएलबी की परीक्षा पास की एक वर्ष की वकालत करके 1956 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए।

1956 में इलाहाबाद बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव 1987, 88 एंव 88 89 बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए।1977 में जनता पार्टी के टिकट से शहर के झूसी विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त एवं बिक्री कर मंत्री रहे।1989, 91,93 ,96 और 2002 में भाजपा से शहर दक्षिणी विधानसभा से लगातार निर्वाचित हुए तीन बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष बने 2004 में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने लेकिन 2007 में तत्कालीन बसपा के टिकट से चुनाव लड़ रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी से चुनाव हार गये और फिर वापसी नही हुई 2014 के राज्यपाल बनें।