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संगम की लहरों पर ठेकेदारों का राज

ठेकेदारों की हनक से मेला प्रशासन की व्यवस्था का कोई मतलब ही नही

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Ashish Kumar Shukla

Feb 19, 2016

इलाहाबाद. संगम में नाविको की मनमानी या प्रशासन की अनदेखी संगम में आने वाले श्रद्वालुओं को संगम दर्शन और घुमाने के नाम पर मनमाने तरीके से पैसे वसूलते है। पैसा कमाने की होड़ में नियम कानून सभी दर किनार हैं ठेकेदारों की हनक से मेला प्रशासन की व्यवस्था का कोई मतलब ही नही हैं। संगम में श्रद्वालुओं को पूजा पाठ कराने वा सैर कराने में बड़ी संख्या में नाविक सुबह से ही अपनी-अपनी नाव को लेकर डट जाते है।

संगम वा गंगा और यमुना के घाटों पर नाव वालो का कब्जा रहता है। माघ मेले के दौरान संगम में नाव चलाने के लिए नाविको का अलग से रजिस्ट्रेशन मेला प्रशासन करता है। कई सरतो और नियमों के अनुसार नाव चलाने की अनुमति दी जाती है लेकिन यह सब सिर्फ रजिस्टर पर दर्ज होता है। मेला के अधिकारी बिना किसी जांच पड़ताल के इनका रजिस्ट्रेेशन कर देते हैं। इनके पास ना तो कोई सुरक्षा का इंतजाम होता है ना इनकी नाव देखी जाती है इनके पास जीवन रक्षा उपकरण भी नही होते हैं।

पिछले दिनो माघ मेले में स्वास्थ्य विभाग की नाव पलटी थी जिसमें स्वास्थ्य विभाग ने एक प्राइवेट नाव मेले तक के लिए अधिगृृहित की है। इसके लिए नाविक को एक निश्चित रकम दी जाती है। इसके बावजूद भी नाविक गोपाल ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चोरी से यात्रियों को बिठाकर गंगा दर्शन करा रहे है। उसी समय उसकी नाव पलट गयी थी जिसमें सवार सभी लोगो को गोताखोरो ने बचा लिया था लेकिन नाविक के खिलाफ कार्यवाई का आदेश हुआ लेकिन इससे मेला प्रशासन की लापवराही साफ दिखती है।

रजिस्ट्रेशन के नाम पर ठेकेदार नाविको से मनमाने पैसे लेकर रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। इसबार मेले में सिर्फ 150 नाविको ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इनमें से ज्यादातर नावो को सरकारी व्यवस्था के लिए प्रशासन ने अधिगृृहित किया है। लेकिन संगम घाट पर मौजूदा समय में लगभग 2000 हजार से ज्यादा नावे चल रही हैं। जब मेला अधिकारी से इसके बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि अवैध चल रही नावो को चिन्हित किया जा रहा है उनपर कार्यवाई होगी । जब की मेला समाप्ति की ओर है लेकिन अभी तक अवैध नावो का चिन्ही करण नही हो सका है।

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