15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

444 साल बाद योगी सरकार ने बदल दिया अल्लाह-वास का नाम,बदल जायेगे अब यहाँ के हर दस्तावेज

मच्छर न काटें तब मैं बदलाव मानूंगा बाकी हम इलाहाबाद से मोहब्बत करने वाले लोग हैं।

3 min read
Google source verification
See Siberian Bird on sangam Allahabad

See Siberian Bird on sangam Allahabad

इलाहाबाद:लंबे समय से चल रही अटकलोंए तैयारी और विरोध के बीच के उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ ने आखिर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया। पिछले दिनों ही इस प्रस्ताव पर इलाहाबाद में संत समाज से संस्तुति ली गई थी। मंगलवार को उत्तरप्रदेश कैबिनेट ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने को मंजूरी दी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और उप्र सरकार के प्रवक्ता सिदार्थनाथ सिंह ने इस फैसले की जानकारी दी है।1574 में अकबर ने इस शहर का नाम इलाहाबास कर दिया था जिसका अर्थ है जहां अल्लाह का वास हो। कालांतर में इलाहाबास से इलाहाबाद बन गया। नाम बदलने की मांग लंबे समय से उठती रही थी। महामना मदनमोहन मालवीय ने भी ब्रिटिश राज के समय यह आवाज उठाई थी। उसके बाद ससे लगातार यह मांग उठती रही थी।

कई बार बदल गया नाम
यह पहली बार नहीं है जब संगम नगरी का नाम बदला है। इलाहाबाद का नाम समय के साथ बदलता रहा है। कभी मुगलों ने तो ब्रिटिश हुकूमत ने लेकिन प्रयाग से इलाहाबाद और प्रयागराज होने का सफर बेहद सियासी होता दिख रहा है। इलाहाबाद का नाम बदलने के बाद एक बड़ा बदलाव भी होने जा रहा है। प्रयागराज के नाम की अधिसूचना जैसे ही जारी होगी। जिले के हर सरकारी कार्यालयए सरकारी कागजात और व्यक्तिगत इलाहाबाद की जगह प्रयागराज दर्ज हो जाएगा। गंगा यमुना सरस्वती त्रिवेणी की धरती पर सैकड़ों बरस बाद एक बार फिर सरकारी दस्तावेजों में इलाहाबाद की जगह प्रयागराज का नाम लिखा जाएगा।

यूपी कैबिनेट में मंजूर हुआ नाम
गौरतलब हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिन पूर्व अपने दो दिवसीय दौरे पर संगम नगरी में थे। इस दौरान कुंभ के मद्देनजर गठित किए गए मार्गदर्शक मंडल की बैठक हुई इसमें राज्यपाल राम नाईक में योगी सरकार को जनमानस की मांग को देखते हुए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने का प्रस्ताव दिया था। जिसे आज यूपी कैबिनेट में मंजूर कर लिया और इलाहाबाद को सैकड़ों बरस बाद फिर उसका नाम प्रयागराज दिया गया ।

1574 के अकबर के फैसले पलट दिया
केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर छिड़े संग्राम के बीच योगी सरकार ने मुगल शासक अकबर के सन 1574 के फैसले को 444 साल बाद पलट दिया। सरकार के इस आदेश के बाद अब गंगा-यमुना और सरस्वती के संगम किनारे बसा शहर अपने पुराने नाम प्रयागराज से जाना जाएगा। मिलीजुली प्रतिक्रिया के साथ सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर शहर का नाम बदलने से क्या शहर के नाम से सदियों से मशहूर इलाहाबाद अमरूदए इलाहाबादी भौकाल को लोग क्या कहेंगे।

दिमाग में तो इलाहाबाद फीड हो गया
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी रोड पर स्टेशनरी की दुकान चलाने वाले कपिल गुप्ता कहते हैं दिमाग में तो इलाहाबाद फीड हो गया। इसे प्रयागराज करने में पीढ़ियां लग जाएंगी। मैं नाम बदलने का विरोध नहीं करता लेकिन यह भी सच है कि इसे जुबान तक लाना आसान नहीं होगा। प्रयाग स्टेशन के करीब रिसर्च इंस्टीटयूट के दीपक दुबे कहते हैं हमारे लिए तो प्रयाग पहले से फ्रेंडली है क्योंकि हम तो बचपन से प्रयाग स्टेशन कहते आ रहे हैं। पर बाहर के लोगों के दिमाग में इलाहाबाद बसा है। कागजों में आसानी से नाम बदल जाएगा पर दिमाग में बसने में समय लगता है।

हम इलाहाबाद से मोहब्बत करने वाले हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनुवेंद्र सिंह कहते हैं जब युवाओं को नौकरी मिलने लगेए पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाए दारागंज, सलोरी, अल्लापुर में सफाई दिखे और मच्छर न काटें तब मैं बदलाव मानूंगा। बाकी हम इलाहाबाद से मोहब्बत करने वाले लोग हैं। नाम कुछ भी कहें हम तो वही जानेंगे। मनुवेंद्र सवाल करते हैं कि आखिर इलाहाबादी अमरूद को क्या कहेंगे। अब प्रयागी अमरूद कहने में तो अच्छा नहीं लग रहा। क्या सरकार इसको भी बदलेगी। वहीं, विश्वविदालय की छात्र राजनीति से जुड़े अजीत यादव कहते हैं यह भाजपा का सियासी हथकंडा है। सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।

क्या विवि और हाईकोर्ट का नाम बदलेगा
जिले का नाम बदलने के बाद इस बात की भी चर्चा शुरू हो गई है कि अब किन कार्यालयों और दफ्तरों के नाम बदले जाएंगे। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इलाहाबाद विश्वविद्यालय और हाईकोर्ट का नाम बदला जाएगा। क्या हाईकोर्ट को भी प्रयागराज हाईकोर्ट कहेंगे। हालांकि बम्बई का नाम बदलकर मुंबई करने के बाद भी वहां हाईकोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के नाम से जाना जाता है। वहीं, आईआईटी भी बॉम्बे के नाम पर है। ऐसा ही मामला पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का भी है। कलकत्ता का नाम कोलकाता होने के बावजूद हाईकोर्ट को पुराने नाम कलकत्ता हाईकोर्ट के नाम से जानते हैं

अधिसूचना के बाद अरबों का खर्च
हिंदी के बड़े आलोचक प्रो राजेंद्र कुमार कहते हैं कि प्रयागराज बनाने में सिर्फ अधिसूचना जारी करना ही नहीं है। इसे मूर्त रूप देने में सरकारी खजाने से अरबों रुपए खर्च होंगे। नाम परिवर्तन के बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकार को भारी.भरकम खर्च उठाना पड़ेगा। इलाहाबाद के इतिहास को संजोने की जरूरत होगी।

इन विभागों का बदलेगा नाम
नाम के परिवर्तन के बाद बैंक, शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश पुलिस, वायुसेना, सीडीए पेंशन, स्टॉक एक्सचेंज, आयकर विभाग, सेंट्रल एक्साइज, कलेक्ट्रेट, नगर निगम, एडीए, जलकल, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों में इलाहाबाद प्रयागराज के नाम से दर्ज होगा।